मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने रूस के यूराल क्षेत्र स्थित सालावत पेट्रोकेमिकल प्लांट और एफिप्स्की ऑयल रिफायनरी पर हमला किया, जिससे एक रिफायनरी में आग लग गई। वहीं रूस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया।
रूस के पेट्रोकेमिकल प्लांट को बनाया निशाना
यूक्रेन ने मंगलवार को रूस के यूराल क्षेत्र में स्थित सालावत पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमला किया। क्षेत्रीय गवर्नर के मुताबिक, हमले से संयंत्र को नुकसान पहुंचा है, हालांकि उत्पादन पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि क्षति की मरम्मत कुछ ही दिनों में पूरी कर ली जाएगी।
यूक्रेन का दावा, रिफायनरी में लगी आग
यूक्रेनी सेना ने दावा किया कि सोमवार और मंगलवार की रात सालावत पेट्रोकेमिकल प्लांट के साथ-साथ एफिप्स्की ऑयल रिफायनरी को भी निशाना बनाया गया। सेना के अनुसार दोनों प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा और रिफायनरी में आग लग गई।
यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य रूस की ईंधन निर्यात क्षमता को कमजोर करना है, ताकि युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता प्रभावित हो और वह हमलों को कम करने के लिए मजबूर हो।
जवाबी कार्रवाई में रूस ने कीव पर फिर किया हमला
यूक्रेन के हमलों के बाद रूस ने राजधानी कीव पर एक बार फिर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। जुलाई महीने में यह कीव पर पांचवां बड़ा हमला बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, राजधानी के 16 अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाया गया। फिलहाल नुकसान का आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है।
उधर, खार्कीव में रूसी हमले में सात लोगों के घायल होने की सूचना है।
रूस की तेल शोधन क्षमता में आई गिरावट
यूक्रेनी ड्रोन हमलों का असर रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। पेट्रोलियम बाजार पर नजर रखने वाली संस्था कैप्लर के अनुसार, लगातार हो रहे हमलों के कारण रूस की तेल शोधन क्षमता घटकर 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है, जो 21 वर्षों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इससे पहले यह क्षमता लगभग 43 लाख बैरल प्रतिदिन थी।
युद्ध लगातार हो रहा और भी घातक
रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए यूक्रेन के प्रमुख शहरों पर दबाव बनाए हुए है। मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि दोनों देशों के बीच संघर्ष फिलहाल और तेज हो सकता है।