क्रेन और फ्रांस की राफेल डील
कीव/पेरिस: यूक्रेन और फ्रांस ने एक ऐसी डिफेंस डील पर हाथ मिलाया है जिसने दुनिया की सुरक्षा राजनीति में हलचल मचा दी है. ये अभी LOI यानी Letter of Intent है, लेकिन इसका स्केल इतना बड़ा है कि इसे दोनों देशों ने “स्ट्रैटेजिक कमिटमेंट” बताया है. यानी फैसला हो चुका है—अब सिर्फ आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट की औपचारिकता बाकी है.
डील का सबसे चमकदार हिस्सा है 100 राफेल F4 फाइटर जेट, जो फ्रांस का सबसे एडवांस्ड और हाई-टेक मल्टी-रोल विमान है. यह वही जेट है जो लंबी दूरी की बॉम्बिंग, डॉगफाइटिंग और मिसाइल डिफेंस—सबकुछ एक साथ कर सकता है. इसकी एंट्री से यूक्रेन की एयर फोर्स का चेहरा बदल सकता है.
इसके साथ पैकेज में शामिल है 8 SAMP/T एयर डिफेंस सिस्टम, जिनके बारे में कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि ये रूसी बैलिस्टिक मिसाइल रोकने में अमेरिकी पैट्रियट से भी बेहतर परफॉर्म करते हैं. इसके अलावा एयर-टू-एयर मिसाइलें, AASM हैमर गाइडेड बॉम्ब्स और SCALP क्रूज मिसाइल जैसे हथियार यूक्रेन की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे.
सबसे दिलचस्प हिस्सा: ड्रोन्स और इंटरसेप्टर ड्रोन का को-प्रोडक्शन सीधे यूक्रेन में शुरू होगा. यानी यूक्रेन सिर्फ खरीद नहीं रहा, बल्कि फ्यूचर टेक्नोलॉजी में अपना हिस्सा भी बना रहा है.
टाइमलाइन लंबी है—कुल 10 साल की. पहली डिलीवरी 2028-29 में होगी और पूरा प्रोजेक्ट 2035 तक पूरा होने की उम्मीद है. पायलट्स को फ्रांस में ट्रेनिंग दी जाएगी, और जो पहले से मिराज जेट उड़ाते हैं, वे जल्दी राफेल में ढल जाएंगे.
क्यों कहा जा रहा है यह डील गेम-चेंजर?
यूक्रेन की एयर फोर्स अभी पुराने सोवियत MiG-29 और Su-27 पर टिकी है. लेकिन पिछले महीनों में F-16, मिराज-2000 और अब 100 राफेल मिलने से यूक्रेन की हवाई ताकत सीधे यूरोप की टॉप फोर्सेस में शामिल हो सकती है.
ज़ेलेंस्की का प्लान बेहद बड़ा है—
कुल 250+ मॉडर्न जेट्स जिसमें 100 राफेल, 100–150 स्वीडिश ग्रिपेन, F-16, मिराज-2000
राफेल की क्षमताएं भी लाजवाब हैं—4.5 जनरेशन जेट, डेल्टा विंग्स, सुपर मैन्यूवरेबिलिटी, स्टेल्थ फीचर्स और SCALP क्रूज मिसाइल जिससे 500+ किमी दूर टारगेट हिट किया जा सकता है। भारत पहले ही इनकी ताकत का अनुभव कर चुका है.
पैसा कहाँ से आएगा?
डील की कीमत सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन अनुमान है— एक राफेल = 100–150 मिलियन यूरो तो 100 राफेल = 10–15 बिलियन यूरो का मेगा प्रोजेक्ट.
फंडिंग यहां से आएगी:
• EU फंड्स
• फ्रांस के बजट
• रूस के फ्रोजन एसेट्स
• और यूक्रेन में को-प्रोडक्शन से लागत और कम हो सकती है
डील साइन होते ही Dassault Aviation के शेयर 8% बढ़ गए—ये भी दिखाता है कि बाज़ार इसे बड़ा गेम-चेंजर मान रहा है.
रूस शांत क्यों है?
क्रेमलिन ने अभी कोई आधिकारिक स्टेटमेंट नहीं दिया है, लेकिन रूसी हमले जारी हैं. पिछले सप्ताह खार्किव में मिसाइल अटैक में कई लोगों की मौत हुई. एक्सपर्ट्स का मानना है कि राफेल आने के बाद रूस को हवा में कड़ी चुनौती मिलेगी—लेकिन ये असर 3–5 साल बाद ही दिखेगा क्योंकि पहले ट्रेनिंग, डिलीवरी और इंटीग्रेशन होगा.
शॉर्ट टर्म में SAMP/T एयर डिफेंस और ड्रोन को-प्रोडक्शन काम आएगा.
लॉन्ग टर्म में राफेल रूस के लिए बड़ा डिटरेंस बन जाएगा.
क्या यह युद्ध का टर्निंग पॉइंट हो सकता है?
संभव है…
क्योंकि पहली बार यूक्रेन को इतने बड़े स्केल पर हाई-टेक वेस्टर्न एयर पावर मिल रही है. लेकिन यह तुरंत असर नहीं दिखाएगी. यह लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी अपग्रेड है, जो समय के साथ रूस के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकता है.
फिलहाल दुनिया की नजर इस पर है कि रूस कब और कैसे रिएक्ट करता है—
और क्या ये डील यूक्रेन-रूस युद्ध की दिशा बदल देगी.
आने वाला समय इसका जवाब देगा.
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