नई दिल्ली/दुबई | दुनिया के सबसे शक्तिशाली तेल संगठन OPEC और OPEC+ में दरार पड़ गई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस गुट से बाहर निकलने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह कदम तब आया है जब ईरान युद्ध (Iran War) के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई चेन पहले से ही चरमराई हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिखराव का सबसे बड़ा फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिलने वाला है।
क्यों हिल गया वैश्विक बाजार?
OPEC की कमजोरी: दुनिया का छठा सबसे बड़ा तेल भंडार (120 अरब बैरल) रखने वाला देश अब संगठन के कोटा नियमों से आजाद है।
ट्रंप का फायदा: राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से OPEC को “दुनिया को लूटने वाला संगठन” कहते रहे हैं। गुट का टूटना उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ एनर्जी पॉलिसी को मजबूत करेगा।
ADNOC का मास्टरप्लान: UAE अब 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन के अपने लक्ष्य को स्वतंत्र रूप से पूरा कर सकेगा।
ट्रंप के लिए ‘जीत’ जैसी स्थिति क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह भू-राजनीतिक (Geo-political) जैकपॉट जैसा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
तेल की कीमतों पर नियंत्रण: ट्रंप चाहते हैं कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें कम रहें ताकि अमेरिका में महंगाई पर काबू पाया जा सके। एक बंटा हुआ OPEC अब मिलकर उत्पादन में कटौती नहीं कर पाएगा, जिससे कीमतें गिर सकती हैं।
अमेरिका का बढ़ता कद: पिछले एक दशक में अमेरिका तेल आयातक से बड़ा निर्यातक बन चुका है। OPEC के कमजोर होने से वैश्विक कीमतों को तय करने में वॉशिंगटन की भूमिका और अहम हो जाएगी।
रणनीतिक लचीलापन: खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा के बदले तेल की राजनीति करने वाले ट्रंप के लिए अब UAE जैसे देशों से अलग-अलग (Individual) डील करना आसान होगा।
ईरान युद्ध और होर्मुज का संकट
ईरान संघर्ष ने पहले ही सप्लाई को बाधित कर दिया है। मार्च 2026 में UAE का उत्पादन 3.4 मिलियन बैरल से घटकर 1.9 मिलियन बैरल रह गया था। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग रुकने से संकट गहराया हुआ है। ऐसे समय में UAE का संगठन छोड़ना यह संकेत देता है कि वह अब अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए पुराने क्षेत्रीय गठबंधनों के बजाय नए विकल्पों (संभवतः अमेरिका के साथ अधिक तालमेल) की ओर देख रहा है।
क्या कच्चा तेल सस्ता होगा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि OPEC के सदस्य देश स्वतंत्र रूप से काम करने लगे, तो बाजार में कच्चे तेल की बाढ़ आ सकती है।
सप्लाई में वृद्धि: कोटा खत्म होने से UAE अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करेगा।
मुद्रास्फीति में राहत: तेल सस्ता होने से दुनिया भर में ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग लागत कम होगी, जो ट्रंप की आर्थिक स्थिरता की योजना को बल देगी।
UAE की नाराजगी की असली वजह
UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गश के बयानों से साफ है कि वे क्षेत्रीय सहयोग परिषद (GCC) के ‘कमजोर’ रवैये से नाखुश थे। ईरानी हमलों पर अरब देशों की सैन्य प्रतिक्रिया न के बराबर रही, जिससे UAE को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा।