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भारत-चीन रिश्तों में यू-टर्न! डोभाल-वांग यी बैठक से खुले संवाद के रास्ते, क्या BRICS के मंच पर भारत और चीन में बनेगी बात

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों में अब सकारात्मक बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान भारत के NSA अजीत डोभाल “Ajit Doval” और चीन के विदेश मंत्री वांग यी “Wang Yi” के बीच हुई अहम मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है। यह बातचीत सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से जमे अविश्वास को कम करने की बड़ी कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

बंद पड़े संवाद तंत्र फिर होंगे सक्रिय

2020 में LAC पर सैन्य तनाव के बाद भारत और चीन के बीच कई अहम संवाद तंत्र ठप पड़ गए थे। अनुमान है कि करीब 50 द्विपक्षीय वार्ता मंच प्रभावित हुए थे। अब दोनों देशों ने इन तंत्रों को फिर से सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

चीन चाहता है कि व्यापार, निवेश, कॉर्पोरेट सहयोग, कानून प्रवर्तन और मीडिया एक्सचेंज जैसे क्षेत्रों में संवाद तेजी से बहाल हो। वहीं लंबे समय से रुकी सीधी वाणिज्यिक उड़ानों को दोबारा शुरू करने को लेकर भी दोनों पक्ष अंतिम चरण की बातचीत में पहुंच चुके हैं।

सीमा विवाद पर अभी भी कायम है दूरी

हालांकि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के रुख में बड़ा अंतर बरकरार है। चीन का कहना है कि सीमा विवाद को बाकी द्विपक्षीय संबंधों से अलग रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। बीजिंग का मानना है कि सीमा पर हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं और अन्य क्षेत्रों में सहयोग रुकना नहीं चाहिए।

दूसरी ओर भारत ने साफ कर दिया कि सीमा पर स्थायी शांति और पूर्ण सैन्य पीछे हटने के बिना संबंधों का सामान्यीकरण संभव नहीं है। NSA अजीत डोभाल ने दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग एक-दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे हैं और इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

ग्लोबल साउथ की राजनीति में बढ़ सकती है साझेदारी

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और चीन ग्लोबल साउथ की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। ऐसे में BRICS जैसे मंचों पर दोनों देशों का सहयोग वैश्विक शक्ति संतुलन को अधिक मल्टीपोलर और बैलेंस्ड बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत ने इस दौरान ताइवान को लेकर अपनी पारंपरिक नीति को भी दोहराया और क्षेत्रीय स्थिरता के महत्व पर जोर दिया।

अब आगे क्या?

अब सबकी नजर बीजिंग में होने वाली विशेष प्रतिनिधियों की अगली बैठक पर है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चीन का दौरा कर सकता है। यह बैठक न सिर्फ सीमा विवाद पर आगे की रणनीति तय करेगी, बल्कि साल के अंत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात की रूपरेखा भी तैयार कर सकती है।

क्यों है यह बैठक अहम?

भारत और चीन के संबंध सिर्फ दो पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों का असर पूरे एशिया और वैश्विक राजनीति पर पड़ता है। ऐसे में डोभाल-वांग यी वार्ता को एक ऐसे संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जो भविष्य में सहयोग, स्थिरता और संवाद के नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है। हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन दोनों देशों की ओर से बातचीत जारी रखने की इच्छा यह बताती है कि टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।

news desk

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