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आंखों में जलन और किरकिराहट से परेशान? जानिए ड्राई आई से बचने के आसान तरीके

अक्सर लोगों को लगता है कि जैसे ही सर्दियां खत्म होंगी, आंखों में होने वाली जलन और सूखापन भी अपने-आप ठीक हो जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि कई लोगों को यह समस्या बसंत और यहां तक कि गर्मियों में भी परेशान करती रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव, बढ़ते प्रदूषण, एलर्जी और हमारी रोजमर्रा की आदतें मिलकर ड्राई आई की परेशानी को लंबा खींच सकती हैं।

क्या है ड्राई आई सिंड्रोम?

ड्राई आई सिंड्रोम तब होता है जब आंखें पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बना पातीं या फिर बने हुए आंसू जल्दी सूख जाते हैं। आंसू केवल पानी नहीं होते, बल्कि उनमें तेल और म्यूकस की परत भी होती है जो आंखों को नम और सुरक्षित रखती है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो जलन, चुभन, लालिमा, धुंधला दिखना, रोशनी से परेशानी और आंखों में किरकिराहट जैसी शिकायतें शुरू हो जाती हैं।

सर्दियों का असर देर तक क्यों रहता है?

सर्दियों की ठंडी और शुष्क हवा आंखों की नमी कम कर देती है। भले ही मौसम बदल जाए, लेकिन आंखों की ऊपरी सतह पर आई सूजन और आंसुओं की परत में आई गड़बड़ी तुरंत ठीक नहीं होती। पलकों में मौजूद तेल ग्रंथियां (मेइबोमियन ग्लैंड्स) भी सामान्य स्थिति में लौटने में समय लेती हैं। यही वजह है कि सूखापन बना रहता है।

स्क्रीन टाइम और बदलती जीवनशैली

ठंड के मौसम में लोग ज्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं और मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ज्यादा स्क्रीन देखने से पलक झपकने की दर कम हो जाती है, जिससे आंसू तेजी से सूखते हैं। यह आदत अक्सर मौसम बदलने के बाद भी जारी रहती है, जिससे समस्या लंबी चलती है।

बसंत में एलर्जी का असर

सर्दियों के बाद जैसे ही बसंत आता है, धूल बढ़ जाती है। एलर्जी के कारण आंखों में खुजली, सूजन और जलन होती है, जो ड्राई आई के लक्षणों को और बढ़ा देती है। कई बार एलर्जी और ड्राई आई के लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे परेशानी ज्यादा महसूस होती है।

एसी, पंखे और कम नमी

गर्मी बढ़ने पर लोग एयर कंडीशनर और पंखों का उपयोग करने लगते हैं।ये मशीनें हवा की नमी कम कर देती हैं, जिससे आंखों के आंसू जल्दी सूख जाते हैं। इसी वजह से मौसम बदलने के बाद भी आंखों का सूखापन ठीक नहीं होता।

क्या करें बचाव के लिए?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रिजर्वेटिव-फ्री आर्टिफिशियल टीयर्स का उपयोग करें, स्क्रीन से हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें (20-20-20 नियम), घर में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें और पर्याप्त पानी पिएं। बाहर निकलते समय धूप का चश्मा पहनना भी फायदेमंद है।

अगर आंखों में लगातार दर्द हो, धुंधला दिखे या आंखें ज्यादा लाल हो जाएं, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर को दिखाएं। समय पर इलाज से परेशानी बढ़ने से रोकी जा सकती है।

Afifa Malik

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