अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने विस्तृत बयान जारी कर श्रद्धालुओं से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि रामलला के दानपात्र में श्रद्धापूर्वक चढ़ाई गई धनराशि की गिनती के दौरान चोरी की घटना बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक है। इस घटना से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पूर्व निर्धारित श्रीमद्भागवत कथा पूरी करने के बाद वह 5 जुलाई को अयोध्या पहुंच रहे हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि कोषाध्यक्ष के तौर पर उनकी जिम्मेदारी केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना है और अब तक का पूरा हिसाब ऑडिटेड है, जिसकी अधिकृत स्तर पर कभी भी जांच कराई जा सकती है।
स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि रामलला की हुंडी में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धनराशि की गिनती के दौरान चोरी होना एक जघन्य कृत्य है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह गड़बड़ी काफी समय से चल रही थी। यह तथ्य सामने आने के बाद सभी रामभक्तों को गहरा आघात पहुंचा है और इस घटना ने उन्हें भी दुखी और लज्जित किया है।
कोषाध्यक्ष ने साफ किया कि रामलला के दानपात्र में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से उनका कभी सीधा संबंध नहीं रहा। उन्होंने बताया कि यह काम स्थानीय न्यासी और संबंधित अधिकारी बैंक के साथ तय मानक प्रक्रिया के तहत संचालित करते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी पिछले महीने पहली बार विस्तार से दी गई थी।
उन्होंने कहा कि मंदिर की आय-व्यय का पूरा रिकॉर्ड शुरू से सुरक्षित और ऑडिटेड है। उनके अनुसार वह लगातार प्रवास पर रहते हैं, इसलिए पुणे स्थित कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट सहयोगी प्रत्येक महीने अयोध्या आकर वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करते हैं और आवश्यक मार्गदर्शन भी देते हैं।
स्वामी गोविंद देव गिरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने न्यासी बनने के बाद मंदिर के लिए किसी से भी नकद दान या वस्तु स्वीकार नहीं की। केवल दो अपवाद रहे, जिनकी विधिवत रसीद संबंधित दानदाताओं को तत्काल उपलब्ध करा दी गई थी।
उन्होंने बताया कि मंदिर से होने वाले सभी भुगतान सीधे बैंक के माध्यम से किए जाते हैं। उनके पास कोई चेकबुक नहीं है और वह अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी नहीं हैं। मंदिर में किसी प्रकार का नकद भुगतान नहीं किया जाता।
कोषाध्यक्ष ने कहा कि चोरी कितनी हुई, कब हुई और कैसे हुई, यह जांच का विषय है। उन्होंने जांच एजेंसियों और विशेष जांच दल पर भरोसा जताते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा, प्रभावशाली या किसी भी पद पर क्यों न हो, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और न्यायालय से कड़ी सजा दिलाई जानी चाहिए।
स्वामी गोविंद देव गिरी ने न्यास से अपील की कि भविष्य में दानपात्र की गिनती और प्रबंधन के लिए ऐसी मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें विशेषज्ञों की मदद से हर प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी हो और श्रद्धालुओं के दान की पाई-पाई का स्पष्ट हिसाब सुनिश्चित किया जा सके।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान श्रीराम की कृपा से सभी संशय दूर होंगे, दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में रामलला का मंदिर पारदर्शिता और आदर्श व्यवस्था का वैश्विक उदाहरण बनेगा।
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