नई दिल्ली/कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आ गया है, जिसने ममता बनर्जी के 15 साल पुराने सियासी साम्राज्य की नींव हिला दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक की सबसे बड़ी बगावत खुलकर सामने आ गई है।
रविवार को दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर टीएमसी के बागी सांसदों की एक बेहद गोपनीय और अहम बैठक हुई, जिसके बाद बंगाल से लेकर दिल्ली तक का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है।
बैठक के बाद टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। उन्होंने एलान किया, “हम कल सोमवार (15 जून, 2026) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे और संसद में टीएमसी से अलग एक नए गुट के रूप में मान्यता देने की औपचारिक मांग करेंगे।”
“यह कदम ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है, जिससे केंद्र से लेकर राज्य तक पार्टी के विभाजन पर मुहर लग जाएगी।”
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर हुई इस बैठक में टीएमसी के 14 से 15 लोकसभा सांसद शामिल हुए। यह संख्या टीएमसी को संसदीय दल में दो-फाड़ करने के लिए काफी है। बैठक में शामिल होने वाले कुछ प्रमुख चेहरों के नाम सामने आए हैं:
ममता बनर्जी के लिए अपनी ही पार्टी के सांसदों को एकजुट रख पाना अब नामुमकिन नजर आ रहा है। यदि कल लोकसभा स्पीकर इस नए गुट को मान्यता दे देते हैं, तो संसद में ममता बनर्जी की ताकत आधी रह जाएगी।
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