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‘यह लोकतंत्र की जीत है’… धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का पहला बयान, सीजेपी और युवाओं को दी बधाई

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए सीजेपी, देश के युवाओं और आंदोलन का समर्थन करने वाले नागरिकों को बधाई दी। साथ ही कहा कि अब जवाबदेही से आगे बढ़कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में काम करने का समय है।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के साथ जारी पत्र में कहा कि वह चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और भावनाओं का सम्मान करना उनका नैतिक दायित्व रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का सरकार ने तत्काल संज्ञान लिया और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

‘शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत’

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है, जो सड़कों से निकली है। उन्होंने कहा कि यह शांति, धैर्य और दृढ़ संकल्प की सफलता है। वांगचुक ने सीजेपी और देश की जेन-ज़ेड पीढ़ी को बधाई देते हुए उन सभी नागरिकों का भी आभार जताया जिन्होंने बिना डरे देशभर से अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि अब जवाबदेही से आगे बढ़ते हुए सुधार की दिशा में काम होना चाहिए।

पत्नी गीतांजली अंग्मो ने भी दी प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजली अंग्मो ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि अगर किसी ने भारत के ‘विश्वगुरु’ होने का वास्तविक अर्थ दिखाया है तो वह देश की जेन-ज़ेड पीढ़ी है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने बिना नफरत, बिना हिंसा और बिना अंध समर्थन के अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े होकर लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। उनके अनुसार, देश के युवाओं ने यह साबित किया कि अपने ही देश को नुकसान पहुंचाए बिना भी अन्याय के खिलाफ प्रभावी संघर्ष किया जा सकता है।

अभिजीत दीपके बोले- लोकतंत्र में डरने की जरूरत नहीं

इससे पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि अगर लोग बिना डरे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं तो सरकार को जवाब देना पड़ता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं।

दो मांगों पर अब भी अड़ी है सीजेपी

अभिजीत दीपके ने कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा 20 तारीख को प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी पूरी होनी चाहिए। उनका कहना है कि इन दोनों मांगों के पूरा होने तक संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

vineet verma

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