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क्यूट दिखने वाले कबूतर बन सकते हैं जान के लिए आफत! फंगल इंफेक्शन और फेफड़ों की बीमारी का खतरा

कबूतरों को फिल्मों में सालों से बेहद क्यूट और नुकसानरहित प्रेमी पक्षी के रूप में दिखाया जाता रहा है। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसी फिल्मों में कबूतरों को खास अंदाज में पेश किया गया, जहां अमरीश पुरी और शाहरुख खान को कबूतरों को दाना डालते हुए देखा गया। यही वजह है कि आज भी लोग कबूतरों के झुंड को दाना डालते नजर आते हैं।

कबूतरों के बीच से दौड़ते हुए गुजरना, उड़ते कबूतरों की पृष्ठभूमि में फोटो और वीडियो बनाना आम बात हो गई है। लेकिन आज हम आपको जो जानकारी देने जा रहे हैं, वह सीधे आपकी सेहत से जुड़ी है। अगर आप अपनी सेहत को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो कबूतरों से दूरी बनाए रखना बेहतर हो सकता है।

दरअसल, कबूतर सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कबूतरों से कौन-कौन सी बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है। यहां हम आपको उन बीमारियों के बारे में बता रहे हैं, जो कबूतरों के आसपास रहने या उनके संपर्क में आने से हो सकती हैं।

क्रिप्टोकोकोसिस

क्रिप्टोकोकोसिस एक प्रकार का फंगल संक्रमण है। यह संक्रमण मुख्य रूप से कबूतरों की बीट (मल) के जरिए फैलता है। जब सूखी बीट से उठने वाले फंगस के कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं, तो व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।
इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में बुखार, तेज सिरदर्द और गर्दन में अकड़न शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह संक्रमण दिमाग और फेफड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।

हिस्टोप्लास्मोसिस

हिस्टोप्लास्मोसिस भी एक फंगल इंफेक्शन है, जो पक्षियों खासकर कबूतरों की बीट से निकलने वाले बीजाणुओं को सांस के जरिए अंदर लेने से होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कबूतरों की बीट में हिस्टोप्लाज्मा कैप्सूलैटम नामक फंगस मौजूद हो सकता है।

इस बीमारी के लक्षणों में बुखार, खांसी, सीने में दर्द और अत्यधिक थकान शामिल हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है।

साल्मोनेलोसिस

साल्मोनेलोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो कबूतरों की बीट या उनके पंखों के संपर्क में आने से फैल सकता है। यह संक्रमण आमतौर पर हाथों के जरिए मुंह तक पहुंच जाता है, जिससे व्यक्ति बीमार पड़ सकता है।
इसके लक्षणों में दस्त, बुखार और पेट में तेज ऐंठन शामिल हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह संक्रमण ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

ई. कोलाई संक्रमण

कबूतर अपने मल के जरिए ई. कोलाई बैक्टीरिया फैला सकते हैं। इसके संपर्क में आने से इंसानों को गंभीर पेट की बीमारी हो सकती है। इसके लक्षणों में दस्त, पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हो सकती है।

फेफड़ों से जुड़ी बीमारी

कबूतरों की बीट या उनसे उड़ने वाली धूल को बार-बार सांस के जरिए अंदर लेने से हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस नाम की बीमारी हो सकती है। इसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है।


इस बीमारी के लक्षणों में सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी और थकान शामिल हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और इलाज लंबा चल सकता है।

news desk

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