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CM योगी के समर्थन में इस्तीफा देने वाले GST अधिकारी का क्या है असली सच? सगे भाई ने खोल दी पोल…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मामला लगातार सुर्खियों में है। शंकराचार्य ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, तो उनके समर्थन में भी कई लोग सामने आ रहे हैं।

माघ मेले के दौरान प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे का कारण शंकराचार्य के साथ हुए बुरे व्यवहार से नाराजगी बताई गई। वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में एक अन्य पीसीएस अफसर प्रशांत सिंह ने भी इस्तीफा दिया।

हालांकि, दोनों इस्तीफों में परिस्थितियां अलग थीं। अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य से जुड़े विवाद के चलते इस्तीफा दिया, जबकि प्रशांत सिंह ने सीएम के प्रति वफादारी दिखाते हुए इस्तीफा दिया।

लेकिन इसके बाद प्रशांत सिंह को लेकर नया खुलासा हुआ है। उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत सिंह ने फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाई। इसके बाद डॉ. विश्वजीत ने अपने ही भाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उन पर गंभीर आरोप लगाए।

डॉ. विश्वजीत सिंह ने दावा किया है कि पीसीएस अधिकारी प्रशांत सिंह ने फर्जी विकलांगता मेडिकल सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की। उन्होंने बताया कि प्रशांत ने नेत्र विकलांगता का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और खुद को 40% नेत्रहीन दिखाकर नौकरी में भर्ती हो गए। डॉ. विश्वजीत का कहना है कि अब प्रशांत सिंह जांच से बचने के लिए इस्तीफे का नाटक कर रहे हैं।

उन्होंने आगे बताया कि GST अधिकारी प्रशांत सिंह के खिलाफ जांच अंतिम चरण में है। केवल फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का ही मामला नहीं है, बल्कि उन पर डेट ऑफ बर्थ में हेरफेर करने का भी आरोप है। जांच के दौरान उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होना था, लेकिन वह दो बार पेश नहीं हुए। डॉ. विश्वजीत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीसीएस अधिकारी प्रशांत सिंह पहले राजनीति में सक्रिय थे। वे पूर्व राज्यसभा सांसद अमर सिंह की राजनीतिक पार्टी (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) के सदस्य रहे और उन्हें मऊ जिले का अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।

बाद में प्रशांत सिंह प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और अपनी सेवाएं देने लगे। पीसीएस अफसर बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग सहारनपुर में वर्ष 2013 में हुई थी।

news desk

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