नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका अब बढ़ते सरकारी कर्ज के दबाव से जूझ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। मंगलवार को कुल कर्ज 40.047 ट्रिलियन डॉलर दर्ज किया गया। कर्ज में इस तेज बढ़ोतरी ने अमेरिकी वित्तीय घाटे और अर्थव्यवस्था की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका के कुल सरकारी कर्ज में करीब 32.26 ट्रिलियन डॉलर वह रकम है, जो देश के बाहर और घरेलू निवेशकों व संस्थानों के पास अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के रूप में है।
वहीं, करीब 7.782 ट्रिलियन डॉलर सरकार की अलग-अलग एजेंसियों और संस्थाओं के बीच मौजूद कर्ज है। यानी अमेरिका के सरकारी कर्ज का बड़ा हिस्सा बाजार से उधार ली गई रकम के रूप में है।
अमेरिका के कर्ज में जिस तेजी से इजाफा हुआ है, वह खास तौर पर चिंता का विषय है। जनवरी 2017 में डोनाल्ड ट्रंप के पहली बार राष्ट्रपति बनने के समय अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज करीब 19.95 ट्रिलियन डॉलर था।
अब यह आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है। यानी एक दशक से भी कम समय में अमेरिका का सरकारी कर्ज लगभग दोगुना हो गया।
अमेरिकी कर्ज में तेज उछाल की एक बड़ी वजह कोरोना महामारी के दौरान सरकार की ओर से किए गए भारी खर्च को माना जाता है। अर्थव्यवस्था को संभालने, कारोबारों को राहत देने और लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए अमेरिकी सरकार ने बड़े पैमाने पर खर्च किया।
हालांकि, विशेषज्ञ केवल कोरोना महामारी को कर्ज बढ़ने की वजह नहीं मानते। लंबे समय से अमेरिका में सरकारी खर्च और टैक्स से होने वाली आय के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। टैक्स कटौती, बढ़ता सामाजिक खर्च और दूसरी सरकारी योजनाओं पर खर्च भी कर्ज बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सरकारी कर्ज बढ़ने के साथ अमेरिका को उस पर ब्याज के रूप में भी भारी रकम चुकानी पड़ रही है। सरकार हर साल करीब 1.1 ट्रिलियन डॉलर कर्ज के ब्याज पर खर्च कर रही है।
वित्त वर्ष 2025 में पहली बार अमेरिकी सरकार का कर्ज पर ब्याज खर्च रक्षा विभाग यानी पेंटागन के बजट से भी ज्यादा हो गया। वित्त वर्ष 2026 के पहले 10 महीनों में ब्याज खर्च मेडिकेयर पर होने वाले खर्च से भी आगे निकल गया।
यह खर्च सोशल सिक्योरिटी के बाद संघीय बजट का दूसरा सबसे बड़ा खर्च बन गया है।
अमेरिका के सरकारी कर्ज में अलग-अलग राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान भी बड़ा इजाफा हुआ है।
ट्रंप के दोनों कार्यकालों को मिलाकर उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान अमेरिकी सरकारी कर्ज में करीब 11.6 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
बढ़ते कर्ज ने अमेरिका की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बजट विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार ने अपनी आय और खर्च के बीच संतुलन नहीं बनाया तो भविष्य में वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
अमेरिका के सामने मुख्य तौर पर तीन विकल्प हैं—टैक्स से आय बढ़ाना, सरकारी खर्च कम करना या दोनों कदम एक साथ उठाना।
हालांकि, सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर, मेडिकेड और पूर्व सैनिकों से जुड़ी योजनाओं पर तुरंत खर्च कम करना आसान नहीं है। अमेरिका की बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ इन योजनाओं पर सरकारी खर्च आगे और बढ़ने की संभावना है।
अमेरिका का बढ़ता सरकारी कर्ज केवल सरकारी बजट की समस्या नहीं है। इसका असर ब्याज दरों, महंगाई और आम लोगों तथा कारोबारों के लिए कर्ज की लागत पर भी पड़ सकता है।
अगर सरकार को लगातार बढ़ते कर्ज की भरपाई के लिए ज्यादा उधार लेना पड़ा, तो भविष्य में ब्याज खर्च और बढ़ सकता है। ऐसे में अमेरिका के सामने आर्थिक विकास बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने की चुनौती और गंभीर होती जाएगी।
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