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तमिलनाडु में ‘असंभव’ हुआ संभव! थलापति विजय को रोकने के लिए स्टालिन और एआईएडीएमके ने मिलाया हाथ?

तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन तस्वीर अब भी साफ नहीं हो सकी है। विजय की पार्टी TVK भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर होने के कारण उनकी ताजपोशी अब तक अटकी हुई है। विजय दो बार राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला है।

यही देरी अब सियासी विवाद का कारण बनती जा रही है। DMK का मास्टरस्ट्रोक? खेल बदल सकती है एक चाल इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक DMK अब अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी AIADMK को बाहर से समर्थन देने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। किसी भी कीमत पर विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकना है।

इस पूरे सियासी खेल की चाबी अब एम.के. स्टालिन के हाथ में है। अगर स्टालिन AIADMK को समर्थन देने का फैसला करते हैं, तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। विजय की राह लगभग बंद हो सकती है सबसे बड़ा सवाल क्या सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद विजय सत्ता से बाहर रह जाएंगे? क्या तमिलनाडु में दुश्मन दल साथ आकर नया समीकरण बनाएंगे?

तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक ऐसी रोमांचक फिल्म बन गई है, जिसका क्लाइमेक्स हर पल बदल रहा है। थलापति विजय की पार्टी TVK 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी शक्ति तो बन गई है, लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुँचने के लिए जरूरी ‘जादुई आंकड़े’ ने सुपरस्टार की नींद उड़ा दी है। राजभवन से लेकर स्टालिन के आवास तक, अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर भारी खींचतान जारी है।

  • बहुमत का गणित: विजय के पास ‘किंग’ बनने का नंबर क्यों नहीं?
  • तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों का समीकरण इस वक्त बेहद पेचीदा है:
  • TVK की ताकत: विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतीं।
  • कांग्रेस का साथ: 5 विधायकों वाली कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया, जिससे आंकड़ा 113 पहुँचा।

एक ‘पेच’ जो भारी पड़ा: थलापति विजय ने खुद दो सीटों से चुनाव जीता है। नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, जिसके बाद गठबंधन का प्रभावी आंकड़ा 112 रह जाएगा।

जादुई आंकड़ा: सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है, यानी विजय अभी भी 6 कदम दूर हैं।

स्टालिन के हाथ में ‘विजय’ की किस्मत!

राज्यपाल आर वी अर्लेकर ने साफ कर दिया है कि जब तक टीवीके बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा पेश नहीं करती, उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाएगा। इसी बीच तमिलनाडु की राजनीति के पुराने खिलाड़ी एमके स्टालिन (DMK) के पास एक ऐसा प्रस्ताव आया है जो पूरे चुनाव नतीजों को पलट सकता है।

बड़ा ट्विस्ट: विरोधी दल एआईएडीएमके (AIADMK) ने स्टालिन को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है। अगर स्टालिन और एआईएडीएमके हाथ मिला लेते हैं, तो थलापति विजय सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद विपक्ष में बैठने को मजबूर हो जाएंगे।

क्या होने वाला है स्टालिन का ‘कठिन फैसला’?

डीएमके चीफ स्टालिन के सामने धर्मसंकट है। वह या तो दोबारा चुनाव की तरफ बढ़ें या फिर अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके के साथ मिलकर विजय को सत्ता से दूर रखें। यह फैसला न केवल विजय का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि तमिलनाडु की किस्मत भी लिखेगा।

news desk

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