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सिनेमा का ‘नायक’ अब तमिलनाडु का ‘भाग्यविधाता’! थलपति विजय और शिवाजी राव की कहानी में अद्भुत समानता

चेन्नई। अक्सर कहा जाता है कि फिल्में समाज का आईना होती हैं, लेकिन कभी-कभी हकीकत फिल्मी पटकथा से भी ज्यादा रोमांचक हो जाती है। मई 2026 में तमिलनाडु की राजनीति जो मोड़ ले रही है, वह साल 2001 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘नायक’ की याद दिलाती है। अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय का सत्ता के शिखर तक पहुँचना किसी फिल्मी ‘क्लाइमेक्स’ से कम नहीं है।

फिल्म ‘नायक’ और विजय: समानताएं जो चौंकाती हैं

व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह: फिल्म ‘नायक’ में एक आम पत्रकार भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ एक दिन का मुख्यमंत्री बनकर सिस्टम को हिला देता है। विजय ने भी अपनी फिल्मों (जैसे सरकार, मेरसल) के जरिए हमेशा व्यवस्थागत सुधार की बात की और अब अपनी पार्टी TVK के जरिए उसे धरातल पर उतारने की चुनौती स्वीकार की है।

पारंपरिक किलों का ध्वस्त होना: फिल्म में जिस तरह शिवाजी राव ने स्थापित नेता बलराज चौहान की सत्ता को उखाड़ फेंका था, ठीक उसी तरह विजय ने तमिलनाडु की दशकों पुरानी DMK और AIADMK की द्विध्रुवीय राजनीति को खत्म कर दिया है।

जनता का दबाव और जनादेश: ‘नायक’ में जनता चाहती थी कि उनका नायक चुनाव लड़े। विजय के मामले में भी उनकी विशाल फैन फॉलोइंग ने एक ‘वोट बैंक’ का रूप लिया और उन्हें 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनाकर सत्ता तक पहुँचाया।

2026 का राजनीतिक करिश्मा

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर टीवीके (TVK) ने जो करिश्मा किया है, उसने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है।

गठबंधन की शक्ति: विजय ने कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर एक मजबूत गठबंधन बनाया, जो फिल्म के उस दृश्य की याद दिलाता है जहाँ आम लोग बदलाव के लिए एक साथ आते हैं।

एजेंडा: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कुशासन के खिलाफ विजय का एजेंडा सीधे तौर पर ‘नायक’ के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ वाले संदेश से मेल खाता है।

चुनौतियां और उम्मीदें

बड़े पर्दे पर अनिल कपूर ने एक दिन में चमत्कार कर दिखाया था, लेकिन थलपति विजय के पास अब पाँच साल का समय है। जनता के सपनों को पूरा करना और पारंपरिक दलों की चुनौती के बीच अपनी साख बचाए रखना उनके लिए असली ‘अग्निपरीक्षा’ होगी।

यह भी निकलता है कि सत्ता हासिल करना केवल आधा युद्ध जीतने जैसा है। असली चुनौती फिल्म की तरह ‘एक दिन’ में नहीं, बल्कि अगले पांच सालों में उन वादों को पूरा करने की है, जिन्हें उन्होंने बड़े पर्दे पर अपने किरदारों के माध्यम से जनता को दिखाया था।

थलपति विजय का मुख्यमंत्री बनना केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति का “सिनेमैटिक ट्रांसफॉर्मेशन” है, जहाँ एक सुपरस्टार अब असल जिंदगी में जनता के सपनों का ‘सारथी’ बनने की भूमिका में है।

SYED MOHAMMAD ABBAS

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