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Indian Press House > Blog > वर्ल्ड > आबादी नहीं, विदेशियों की एंट्री बनी चिंता! स्विट्जरलैंड में क्यों मचा है 1 करोड़ का शोर?
वर्ल्ड

आबादी नहीं, विदेशियों की एंट्री बनी चिंता! स्विट्जरलैंड में क्यों मचा है 1 करोड़ का शोर?

vineet verma
Last updated: June 11, 2026 9:30 am
vineet verma
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बर्न: दुनिया के सबसे समृद्ध और व्यवस्थित देशों में शामिल स्विट्जरलैंड इन दिनों एक बड़े जनमत संग्रह को लेकर चर्चा में है। देश में रविवार को एक अहम वोटिंग होने जा रही है, जिसमें 2050 तक आबादी को 1 करोड़ की सीमा में रखने के प्रस्ताव पर जनता फैसला करेगी। इस बहस के केंद्र में बढ़ता प्रवासन, संसाधनों पर दबाव और बदलती जनसांख्यिकी है।

Contents
जनमत संग्रह की नौबत क्यों आई?आबादी नहीं, प्रवासन बना असली मुद्दाबुजुर्ग बढ़ रहे, युवा घट रहेसमर्थक और विरोधी आमने-सामनेरविवार का फैसला देगा बड़ा संदेश

फिलहाल स्विट्जरलैंड की आबादी करीब 90 लाख है। इनमें लगभग 27 फीसदी लोग ऐसे हैं जो दूसरे देशों से आकर यहां बसे हैं। यानी देश में रहने वाला हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का है। इसी मुद्दे को लेकर दक्षिणपंथी स्विस पीपल्स पार्टी ने आबादी सीमा तय करने की मांग उठाई है।

जनमत संग्रह की नौबत क्यों आई?

स्विट्जरलैंड की प्रत्यक्ष लोकतंत्र प्रणाली के तहत यदि किसी मुद्दे पर 18 महीने के भीतर एक लाख नागरिक समर्थन में हस्ताक्षर कर दें तो उस विषय पर पूरे देश में जनमत संग्रह कराया जा सकता है। आबादी सीमा के प्रस्ताव को भी इतना समर्थन मिल गया, जिसके बाद अब जनता सीधे इस पर वोट करेगी।

पार्टी का तर्क है कि देश के संसाधन, आवास, परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए आबादी को नियंत्रित करना जरूरी है। प्रस्ताव के मुताबिक 2050 तक देश की कुल आबादी 1 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए।

आबादी नहीं, प्रवासन बना असली मुद्दा

दिलचस्प बात यह है कि स्विट्जरलैंड में प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि बेहद कम है। जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो हर साल केवल लगभग 6 हजार लोगों की बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में मौजूदा रफ्तार से 2050 तक आबादी के 1 करोड़ पार पहुंचने की संभावना भी बहुत कम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस वास्तव में जनसंख्या नहीं, बल्कि बढ़ते प्रवासन को लेकर है। पिछले 25 वर्षों में करीब 20 लाख लोग दूसरे देशों से आकर स्विट्जरलैंड में बस चुके हैं, जिससे जनसांख्यिकीय तस्वीर तेजी से बदली है।

बुजुर्ग बढ़ रहे, युवा घट रहे

स्विट्जरलैंड एक और बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। देश में बुजुर्ग आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम हो रही है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में कामकाजी लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए विदेशी पेशेवरों और श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ी है।

डॉक्टर, नर्स, शिक्षक और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ बड़ी संख्या में दूसरे देशों से आकर यहां काम कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में इनकी भूमिका अहम मानी जाती है।

समर्थक और विरोधी आमने-सामने

प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि सीमित संसाधनों वाले देश में अनियंत्रित प्रवासन भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है। उनका दावा है कि समय रहते जनसंख्या सीमा तय करना आवश्यक है।

वहीं विरोधियों का कहना है कि यह कदम अप्रवासियों के खिलाफ बढ़ती राजनीति का हिस्सा है। उनका तर्क है कि स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार विदेशी कामगारों पर काफी हद तक निर्भर हैं और ऐसी नीतियां देश के विकास को प्रभावित कर सकती हैं।

रविवार का फैसला देगा बड़ा संदेश

रविवार को होने वाली वोटिंग केवल जनसंख्या सीमा का फैसला नहीं करेगी, बल्कि यह भी संकेत देगी कि स्विट्जरलैंड बढ़ते प्रवासन और बदलती सामाजिक संरचना को किस नजरिए से देखता है। पूरे यूरोप में प्रवासन को लेकर चल रही बहस के बीच इस जनमत संग्रह के नतीजों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।

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