मैड्रिड: फुटबॉल के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाला स्पेन इन दिनों एक बड़े मानवीय और सुरक्षा संकट के केंद्र में आ गया है। बीते कुछ दिनों में मोरक्को की ओर से बड़ी संख्या में प्रवासियों ने स्पेन के स्यूटा इलाके में प्रवेश की कोशिश की है। दावा किया जा रहा है कि सिर्फ 24 घंटे के भीतर 60 हजार से ज्यादा लोग सीमा तक पहुंच गए, जबकि अवैध घुसपैठ की कोशिशों के दौरान अब तक 67 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक माइग्रेशन संकट, सीमा सुरक्षा और शरणार्थी नीति को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
यह संकट केवल स्पेन तक सीमित नहीं है। पिछले दो दशकों में दुनिया युद्ध, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन और बेरोजगारी के कारण कई बड़े प्रवासी संकटों का सामना कर चुकी है। करोड़ों लोग बेहतर और सुरक्षित जीवन की तलाश में अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
स्पेन और अफ्रीका के बीच स्थित जिब्राल्टर जलडमरूमध्य लंबे समय से अवैध प्रवास का प्रमुख मार्ग रहा है। मोरक्को, अल्जीरिया, माली, सेनेगल और मॉरिटानिया जैसे देशों से हजारों लोग छोटी नावों के जरिए स्पेन पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं।
साल 2006 में कैनरी द्वीप पर बड़ी संख्या में अफ्रीकी प्रवासियों के पहुंचने की घटना को ‘कायुकोस संकट’ के नाम से जाना गया था। इसके बाद स्पेन ने सीमा सुरक्षा मजबूत की, लेकिन प्रवास का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा।
मौजूदा हालात को देखते हुए स्पेन सरकार ने मोरक्को से लगी समुद्री सीमा पर 500 मीटर लंबी नई दीवार बनाने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इससे अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
शनिवार सुबह भी कई लोग तैरकर स्यूटा के तट तक पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दिए, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें वापस लौटा दिया।
साल 2015 में सीरिया के तीन वर्षीय बच्चे एलन कुर्दी की समुद्र तट पर मिली तस्वीर पूरी दुनिया के लिए प्रवासी संकट का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई थी। लाल टी-शर्ट और नीली निकर पहने एलन का शव तुर्की के समुद्र किनारे मिला था।
सीरिया में गृहयुद्ध से बचने के लिए उसका परिवार सुरक्षित जीवन की तलाश में निकला था, लेकिन रास्ते में ही यह दर्दनाक हादसा हो गया। उस तस्वीर ने दुनिया को दिखाया कि युद्ध और हिंसा किस तरह लाखों लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं।
सीरिया में 2011 से जारी गृहयुद्ध के कारण 60 लाख से अधिक लोगों को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी।
साल 2017 में म्यांमार में हिंसा के बाद सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे, जहां कॉक्स बाजार दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर बन गया।
वेनेजुएला में आर्थिक संकट और महंगाई के चलते 70 लाख से अधिक लोग देश छोड़कर दूसरे देशों में बस गए।
साल 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद हजारों अफगान नागरिक किसी भी तरह देश छोड़ने की कोशिश करते रहे और बड़ी संख्या में पाकिस्तान व ईरान पहुंचे।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 में लाखों यूक्रेनी नागरिक पोलैंड, रोमानिया और जर्मनी जैसे देशों में शरण लेने पहुंचे।
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में बढ़ते प्रवास के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें गृहयुद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, हिंसा, आर्थिक संकट, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़, खाद्य संकट और बेहतर रोजगार व सुरक्षित जीवन की तलाश प्रमुख वजहें हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई हिस्सों में सीमाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
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