लखनऊ. उत्तर प्रदेश खेलों की दुनिया में लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है। क्रिकेट से हॉकी तक, राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। लेकिन कई प्रतिभाएँ अभी भी सही मंच न मिलने के कारण उभर नहीं पा रही हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी टी-20 लीग के फाइनल मुकाबले के दौरान कहा कि राज्य में अगर एक से अधिक टीमें होंगी तो खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिलेंगे। उन्होंने यह बात विशेष रूप से क्रिकेट के संदर्भ में कही, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल क्रिकेट तक सीमित रहना चाहिए?
प्रदेश की अनुमानित जनसंख्या वर्तमान में 25 करोड़ 70 लाख के आसपास पहुँच चुकी है। ऐसे विशाल प्रदेश में क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल समेत कई खेल खेले जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपी के खिलाड़ी अपनी चमक बिखेर रहे हैं।
हालांकि, ज़्यादातर टीम खेलों में सीमित संख्या में खिलाड़ी ही मैदान पर उतर पाते हैं। उदाहरण के तौर पर क्रिकेट में 11 खिलाड़ी खेलते हैं, हॉकी में भी 11 खिलाड़ी होते हैं, जबकि फुटबॉल में भी यही स्थिति है।
ऐसे में जनसंख्या के अनुपात में देखा जाए तो खेलों में भागीदारी का दायरा काफी सीमित नजर आता है। यही वजह है कि अब खेल जगत के कई जानकार यह राय दे रहे हैं कि सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि अन्य खेलों में भी एक से अधिक टीमें बनाई जानी चाहिए, ताकि ज्यादा प्रतिभाओं को अवसर मिल सके और राज्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर के और खिलाड़ी उभर सकें।
उत्तर प्रदेश जैसी विशाल आबादी (लगभग 25 करोड़) वाले राज्य के लिए केवल एक रणजी टीम होना क्या न्यायसंगत है?
पूर्व क्रिकेटर मोहसिन रजा ने 2022 में बीसीसीआई सचिव जय शाह को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर गुजारिश की थी कि राज्य के लिए चार रणजी टीमें बनाई जाएँ, ताकि ज्यादा खिलाड़ियों को अवसर मिल सके। उनकी इस मांग का समर्थन पूर्व क्रिकेटर दिव्य नौटियाल ने भी किया।
मोहसिन रजा ने रखे मजबूत तर्क
अपनी मांग के समर्थन में मोहसिन रजा ने ठोस तर्क पेश किए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है, जो देश में सबसे अधिक है। 75 जनपदों वाला यह विशाल राज्य यदि एक देश होता, तो दुनिया का छठा सबसे अधिक आबादी वाला देश होता। इसके बावजूद रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की केवल एक ही टीम होना कई सवाल खड़े करता है।
मोहसिन रजा ने ऐसे कई खिलाड़ियों का भी उदाहरण दिया, जो प्रतिभा होने के बावजूद यूपी टीम में जगह नहीं बना सके और मजबूरी में दूसरे राज्यों से खेलने चले गए। बाद में इन्हीं खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
पूर्ण रणजी क्रिकेटर मोहसिन रजा ने कहा कि जब गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को तीन-तीन रणजी टीमें दी गई हैं, तो उत्तर प्रदेश को यह अवसर क्यों नहीं मिल सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में महाराष्ट्र, मुंबई और विदर्भ, जबकि गुजरात में गुजरात, सौराष्ट्र और बड़ौदा की टीमें रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लेती हैं।
खास बात यह रही कि इस बार मोहसिन रजा ने अपनी बात रखी और बीसीसीआई से क्रिकेट के हित में संतुलित और दूरदर्शी फैसला लेने की अपील की।
वहीं पूर्व क्रिकेटर अशोक बांबी भी कई मौकों पर एक से ज्यादा टीमों की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन मौके सीमित होने के कारण कई खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
अशोक बांबी के अनुसार, केवल एक टीम होने से राज्य की कई प्रतिभाएँ दबकर रह जाती हैं। ऐसे में अगर एक से अधिक टीमें बनाई जाती हैं, तो इससे खिलाड़ियों को ज्यादा अवसर मिलेंगे और इसका सीधा फायदा उत्तर प्रदेश के क्रिकेट विकास को होगा।
दिव्य नौटियाल का बयान
पूर्व क्रिकेटर दिव्य नौटियाल का कहना है कि पूर्वांचल क्षेत्र में क्रिकेट को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, जो एक सकारात्मक पहल है। उन्होंने कहा, “मेरी राय है कि सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि अन्य खेलों में भी टीमों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा नई प्रतिभाओं को अवसर मिल सके।”
दिव्य नौटियाल ने आगे कहा कि वह मोहसिन रजा की मांग से पूरी तरह सहमत हैं, लेकिन साथ ही यह भी चाहते हैं कि क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों को लेकर भी गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि हर खेल की प्रतिभाओं के साथ न्याय हो सके।
वहीं पूर्व क्रिकेटर दिव्य नौटियाल का कहना है कि जिस तरह क्रिकेट में कई टीमों की जरूरत जताई जा रही है, उसी तरह अन्य खेलों जैसे हॉकी और फुटबॉल के लिए भी यह सोचना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश को बिजली विभाग की तरह मध्याचल, पूर्वांचल आदि क्षेत्रों में बाँटकर खेलों में भी विकास किया जाना चाहिए।
दिव्य नौटियाल ने यह भी कहा कि वर्तमान में खेलो इंडिया, फिट इंडिया, टॉपस जैसी योजनाएँ, बढ़ा हुआ खेल बजट और खिलाड़ी-केंद्रित मॉडल खेलों को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन टीमों की संख्या सीमित होने से कई प्रतिभाओं के साथ न्याय नहीं हो पा रहा।
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