सियासी

SIR डेटा ने बढ़ाई BJP की मुश्किल, सपा को कम नुकसान, 2.89 करोड़ वोटर बाहर, BJP में नेताओं को मिला अब ये टारगेट!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। छह जनवरी को जारी इस सूची पर नजर डालें तो करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

इस संशोधन के बाद प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। विपक्षी दल इस कदम को ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘साजिश’ करार दे रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यह ड्राफ्ट लिस्ट नई मुश्किलें खड़ी करती नजर आ रही है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस सूची में बीजेपी के कोर वोटर्स के नाम भी बड़ी संख्या में कटे हैं, जिससे पार्टी के भीतर भी चिंता बढ़ गई है।

हालात इतने खराब हो चुके हैं कि इसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों में जबरदस्त गहमागहमी देखी जा रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के सामने आने के बाद कुछ ऐसी ही तस्वीर उभरकर सामने आ रही है।उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया का असर दोनों प्रमुख दलों—सपा और बीजेपी पर देखा जा रहा है। लोकसभा सीटों के आंकड़ों के अनुसार, नाम सबसे ज्यादा कटे वहीं सीटें रही हैं जहां बीजेपी जीती थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ स्तर तक सक्रिय होकर इस प्रक्रिया में जुटें और अभियान चलाकर उन मतदाताओं के नाम सूची में शामिल कराएं, जो छूट गए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को भी अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर ज़मीनी स्तर पर काम करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

सपा की जीत वाली सीटों पर 15–25% तक नाम कटौती

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी की जीत वाले इलाकों में मतदाता सूची से नाम कटौती आमतौर पर 15 से 25 प्रतिशत के बीच रही है, हालांकि कुछ जिलों में यह आंकड़ा इससे कम या ज्यादा भी दर्ज किया गया।

लोकसभा सीटों के हिसाब से देखें तो कन्नौज में 21.57%, मैनपुरी में 16.17%, कैराना सीट से जुड़े शामली में 16.75%, मुजफ्फरनगर में 16.29%, और मुरादाबाद में 15.76% मतदाताओं के नाम कटे।
इसके अलावा रामपुर में 18.29%, संभल में 20.29%, फिरोजाबाद में 18.13%, एटा में 16.80% और बदायूं में 20.39% कटौती दर्ज की गई।

आंवला लोकसभा सीट से जुड़े बरेली जिले में 20.99% नाम हटे, जबकि खीरी जिले की खीरी और धौरहरा सीटों पर 17.50% कटौती हुई।
मोहनलालगंज लोकसभा सीट वाले लखनऊ जिले में सबसे अधिक 30.04% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए।

पूर्वी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम कटे। सुल्तानपुर में 17.19%, प्रतापगढ़ में 19.81%, इटावा में 18.95%, जालौन में 16.34%, हमीरपुर में 10.78% और बांदा में 13% कटौती दर्ज की गई।
फतेहपुर (16.32%), कौशाम्बी (18%), अयोध्या/फैजाबाद (17.69%), अंबेडकर नगर (13.82%), श्रावस्ती (16.51%), बस्ती (15.70%) और संत कबीर नगर (19.96%) में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए।

आजमगढ़ जिले की लालगंज और आजमगढ़ दोनों सीटों पर 15.25%, घोसी (मऊ) में 17.52%, सलेमपुर से जुड़े देवरिया में 17.22%, बलिया में 18.16%, जौनपुर और मछलीशहर में 16.51%, गाजीपुर में 13.85%, चंदौली में 15.45% और रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र) में 17.93% मतदाताओं के नाम कटे।

बीजेपी की जीत वाली सीटों पर भी भारी कटौती

वहीं भारतीय जनता पार्टी की जीत वाले जिलों में मतदाता सूची से नाम कटौती का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा नजर आ रहा है। कई जगह यह आंकड़ा 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

पश्चिमी यूपी में मेरठ में 24.65%, गाजियाबाद में 28.83%, गौतमबुद्ध नगर में 23.98%, हापुड़ में 22.30%, शाहजहांपुर में 21.76% और फर्रुखाबाद में 20.80% नाम हटाए गए।
अमरोहा में 13.22%, बुलंदशहर में 15.14%, हाथरस में 16.30%, मथुरा में 19.19% और बरेली में 20.99% कटौती दर्ज हुई।

मध्य यूपी में कानपुर नगर में 25.50%, आगरा में 23.25%, लखनऊ में 30.04% और वाराणसी में 18.18% मतदाता सूची से बाहर हुए।
बहराइच में 20.44%, बदायूं में 20.39%, पीलीभीत में 13.61%, हरदोई में 18.04%, एटा में 16.80%, अलीगढ़ में 18.60%, उन्नाव में 17.51% और झांसी में 13.92% नाम कटे।

पूर्वांचल में भी यही रुझान दिखा। प्रयागराज (फूलपुर) में 24.64%, कैसरगंज सीट से जुड़े बहराइच में 20.44%, गोंडा में 18.40%, डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) में 20.33%, महराजगंज में 15.11%, गोरखपुर में 17.61%, कुशीनगर में 18.65%, देवरिया में 17.22%, बांसगांव (गोरखपुर जिला) में 17.61% और भदोही में 16.73% मतदाताओं के नाम हटाए गए।

news desk

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