केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार अब और ज्यादा चर्चा में आ गया है। रेलवे और रक्षा क्षेत्र की कई बड़ी कर्मचारी यूनियनों ने 13 और 14 मई को दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक का मकसद सरकार पर 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर दबाव बनाना है।
दो दिन चलने वाली इस मीटिंग में कर्मचारी संगठनों की आगे की रणनीति तय की जाएगी। यूनियनों ने प्रतिनिधियों से 10 मई तक अपनी भागीदारी कन्फर्म करने को कहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर सरकार जल्द फैसला नहीं लेती है तो आगे आंदोलन और प्रदर्शन जैसे कदमों पर भी चर्चा हो सकती है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें अब मौजूदा महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर बेसिक सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी की जाए
मौजूदा वेतन संरचना को महंगाई के अनुसार अपडेट किया जाए
OPS (Old Pension Scheme) बहाली के मुद्दे पर भी सरकार स्पष्ट फैसला ले
अगर सरकार 8वें वेतन आयोग का गठन करती है, तो इसका सीधा असर लाखों लोगों पर पड़ेगा: 48 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी है और 67 लाख से ज्यादा पेंशनर्स है, इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी केंद्र के वेतन ढांचे को फॉलो करती हैं, इसलिए राज्यों के कर्मचारियों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
सरकारी नियमों के अनुसार हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है।
7वां वेतन आयोग साल 2016 में लागू हुआ था, इसलिए अगला वेतनमान जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी वजह से कर्मचारी संगठन अब सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर चुके हैं।
13-14 मई की बैठक के बाद यूनियनें एक साझा घोषणापत्र जारी कर सकती हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बड़ा विषय बन सकता है, क्योंकि इसका असर लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। फिलहाल फैसला सरकार के हाथ में है, लेकिन कर्मचारी संगठनों की बढ़ती एकजुटता साफ संकेत दे रही है कि अब वेतन आयोग को लेकर देरी को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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