थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर हालात एक बार फिर गर्म हो गए हैं। सोमवार सुबह थाई वायुसेना ने विवादित बॉर्डर पर कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर दी। थाई सेना का कहना है कि कंबोडियाई फोर्सेज कई इलाकों में उनके सैनिकों को निशाना बना रही थीं, इसलिए जवाबी कार्रवाई जरूरी हो गई। दूसरी ओर कंबोडिया का दावा है कि थाई सेना ने भोर में पहले हमला किया और उनके सैनिकों ने कोई जवाबी फायरिंग नहीं की। थाईलैंड का आरोप है कि कंबोडिया की ओर से BM-21 रॉकेट नागरिक इलाकों में गिरे, लेकिन किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।
युद्धविराम समझौता पटरी से उतरा
दोनों देशों के बीच जुलाई में हुए भीषण संघर्ष के बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में एक युद्धविराम तय हुआ था। इसके बावजूद सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता रहा। जुलाई की लड़ाई में 48 लोगों की मौत हुई थी और करीब तीन लाख लोग विस्थापित हुए थे।
पिछले महीने एक थाई सैनिक के भूमि-माइन विस्फोट में घायल होने के बाद थाईलैंड ने युद्धविराम लागू करने की प्रक्रिया रोक दी थी। कंबोडिया के पूर्व शक्तिशाली नेता हुन सेन ने थाई सेना को “उकसाने वाला” करार देते हुए अपने सैनिकों से संयम बरतने की अपील की। थाई प्रशासन के अनुसार अब तक सीमा के चार जिलों से 3,85,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है।
सीमा विवाद का इतिहास
817 किलोमीटर लंबी थाई–कंबोडिया सीमा 1907 में फ्रांस द्वारा बनाए गए नक्शे के आधार पर निर्धारित की गई थी, लेकिन कई क्षेत्रों में सीमांकन अब भी अस्पष्ट है। इसके चलते 2011 में भी दोनों देशों के बीच सप्ताहभर तक भारी गोलाबारी हुई थी।
इधर थाईलैंड ने सीमा के चार जिलों से 3.85 लाख से ज्यादा नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। 817 किलोमीटर लंबी सीमा के कई हिस्सों का सीमांकन अभी तक साफ नहीं है, जिससे हर कुछ सालों में तनाव बढ़ ही जाता है।
अब 8 दिसंबर को फिर से हालात बिगड़े जब थाईलैंड ने दावा किया कि उसके सैनिकों पर कंबोडियाई फायरिंग हुई, जिसके बाद उसने एयरस्ट्राइक की। फिलहाल पूरा बॉर्डर इलाका हाई अलर्ट पर है और दोनों देशों में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।