अमेरिका में भारतीय इमिग्रेंट्स के खिलाफ नाराज़गी अब धार्मिक विरोध तक जा पहुंची है. टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में लगी 90 फीट ऊंची भगवान हनुमान की प्रतिमा पर रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने विवादित टिप्पणी कर बवाल खड़ा कर दिया है. डंकन ने कहा कि अमेरिका एक क्रिश्चियन देश है और यहां हिंदू देवताओं की मूर्तियां नहीं लगनी चाहिए.
पिछले साल अगस्त में अनावरण की गई यह कांसे की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ के नाम से जानी जाती है, क्योंकि भगवान हनुमान ने श्रीराम और माता सीता को मिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. मूर्ति मंदिर परिसर के भीतर होने के बावजूद काफी ऊंची और दूर से दिखने वाली है, जिसके चलते स्थानीय चर्च और कट्टरपंथी समूह पहले से ही इसका विरोध कर रहे थे.
डंकन के बयान से बढ़ा विवाद
डंकन ने एक्स पर मूर्ति का वीडियो साझा करते हुए लिखा – “हम क्यों एक झूठे हिंदू देवता की झूठी मूर्ति यहां रहने दें? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं.” उन्होंने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए बाइबल का हवाला भी दिया.
डंकन की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने इसे हिंदू-विरोधी और भड़काऊ बयान बताते हुए टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी से कार्रवाई की मांग की है. संगठन ने कहा कि यह न केवल भेदभाव विरोधी नीतियों का उल्लंघन है बल्कि अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन का भी अपमान है.
कई इंटरनेट यूजर्स ने भी डंकन को याद दिलाया कि अमेरिका में हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है. एक यूजर ने लिखा – “आप हिंदू नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वह धर्म झूठा है. वेद ईसा मसीह के जन्म से 2000 साल पहले लिखे गए थे और ईसाई धर्म पर भी उनका असर दिखता है.”
ट्रंप ने इस विवाद पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनकी चुप्पी को कई लोग सहमति की तरह देख रहे हैं.