पुणे, 21 अक्टूबर 2025: पुणे के ऐतिहासिक शनिवार वाड़ा में हुए ‘शुद्धिकरण समारोह’ ने महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला दिया है. भाजपा की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी द्वारा रविवार को आयोजित इस समारोह ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन के सहयोगियों को आमने सामने कर दिया है. गठबंधन के सहयोगी दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने कुलकर्णी की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए भाजपा से अपनी सांसद पर लगाम लगाने की मांग की.
विवाद की शुरुआत
18 अक्टूबर को शनिवार वाड़ा, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित पेशवा काल का ऐतिहासिक स्मारक है, वहां कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस घटना के विरोध में भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने 19 अक्टूबर को हिंदू संगठनों, जैसे सकल हिंदू समाज, के साथ मिलकर शनिवार वाड़ा में ‘शुद्धिकरण समारोह’ आयोजित किया. इस दौरान उन्होंने उस स्थान पर गोमूत्र छिड़का जहां नमाज पढ़ी गई थी और शिव वंदना की.
कुलकर्णी ने शनिवार वाड़ा को “हिंदवी स्वराज्य का प्रतीक” बताते हुए नमाज को “अनुपयुक्त” करार दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने वाड़ा के बाहर स्थित एक मजार और दरगाह को एक सप्ताह में हटाने का अल्टीमेटम भी दे डाला. पुणे पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर नमाज पढ़ने वाली तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ एएसआई नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया और क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी.
गठबंधन सहयोगियों की तीखी प्रतिक्रिया
महायुति गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी दलों, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी, ने कुलकर्णी की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. एनसीपी प्रवक्ता रूपाली पाटिल थोम्ब्रे ने कहा, “हम भाजपा से मेधा कुलकर्णी पर लगाम लगाने की मांग करते हैं. सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए. पुणे में हिंदू और मुस्लिम भाई-भाई की तरह रहते हैं”.
शिवसेना के शिंदे गुट ने भी अपनी हिंदुत्ववादी छवि को संतुलित करते हुए इस घटना पर आपत्ति जताई. शिवसेना नेता नीलम गोरहे ने कहा, “शनिवार वाड़ा एएसआई द्वारा संरक्षित है. वहां नियमों का पालन होना चाहिए. अगर कोई उल्लंघन करता है, तो पुलिस और जिला कलेक्टर को कार्रवाई करनी चाहिए. किसी को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वह सरकार में है” गोरहे का यह बयान स्थानीय चुनावों से पहले सांप्रदायिक विवाद से दूरी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
विपक्ष का हमला
वहीं विपक्षी दलों ने इस घटना को भाजपा की “पिछड़ी मानसिकता” और ध्रुवीकरण की रणनीति करार दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, “शनिवार वाड़ा को शुद्ध करने का कार्य हास्यास्पद है. यह कोई धार्मिक स्थल नहीं है. वहां पेशवा काल से ही दरगाह मौजूद है, जिस पर पेशवाओं ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी”. फिलहाल निकाय चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गर्म है.