सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए तामिलनाडु से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। वर्षों से चली आ रही पेंशन सुरक्षा की मांग को पूरा करते हुए DMK सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने “तमिलनाडु सुनिश्चित पेंशन योजना” (TAPS) को लागू करने की घोषणा की है, जिससे सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को रिटायरमेंट के बाद स्थायी आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
नई TAPS योजना को पुराने पेंशन सिस्टम (OPS) की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसकी मांग कर्मचारी पिछले दो दशकों से कर रहे थे। इस योजना के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारियों को उनके अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा। इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA) भी साल में दो बार बढ़ेगा, जैसा कि वर्तमान कर्मचारियों को मिलता है। किसी पेंशनधारी के निधन की स्थिति में उनके नामित परिवार को 60 प्रतिशत पेंशन पारिवारिक पेंशन के रूप में दी जाएगी।
योजना में रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी का भी प्रावधान किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है। जो कर्मचारी आवश्यक सेवा अवधि पूरी नहीं कर पाए हैं, उन्हें भी न्यूनतम पेंशन दी जाएगी। इसके अलावा पहले CPS के तहत रिटायर हो चुके कर्मचारियों के लिए भी करुणा पेंशन का प्रावधान रखा गया है।
इस योजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार को लगभग 13 हजार करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च करना होगा, जबकि हर साल करीब 11 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और शिक्षक जनकल्याण योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकता है। कर्मचारियों और यूनियन संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे लंबे समय से चले आ रहे पेंशन विवाद के अंत के रूप में देखा जा रहा है।