आज रात 11 बजे से 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे तक साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा. खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, ये आंशिक ग्रहण दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका में दिखेगा, लेकिन भारत में अदृश्य रहेगा. लेकिन ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से ये कोई साधारण घटना नहीं – बल्कि सूर्य देव का छिपा आशीर्वाद है! खासकर जब नवरात्रि का पावन समय बस आने ही वाला है, ये ग्रहण मां दुर्गा की शक्ति से जोड़कर जीवन में नई ऊर्जा भर सकता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण राहु के सूर्य को निगलने का प्रतीक है, लेकिन जब ग्रहण अदृश्य होता है, तो ये सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार, भगवान सूर्य ने ऐसे ही कालों में भक्तों को विशेष वरदान दिए. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि 21 सितंबर का ये ग्रहण कन्या राशि में सूर्य की स्थिति के कारण महिलाओं और साधकों के लिए विशेष शुभ साबित होगा. नवरात्रि से पहले ये ग्रहण आपकी कुंडली में सूर्य की कमजोरी को मजबूत करेगा, जिससे करियर, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में उछाल आएगा.
किन 4 राशियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
- मेष राशि: सूर्य आपका स्वामी है, ग्रहण के बाद नौकरी में प्रमोशन और धन लाभ की योग बनेगी. नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती से मिलेगी अपार ऊर्जा.
- सिंह राशि: राजकीय सूर्य की कृपा से नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी. व्यापारियों के लिए गोल्डन चांस – लेकिन ग्रहण काल में सूर्य मंत्र जपें.
- कन्या राशि: ग्रहण इसी राशि में है, इसलिए पढ़ाई-लिखाई में सफलता मिलेगी. महिलाओं को विशेष रूप से सौभाग्य – शादी-विवाह के योग बनेंगे.
- तुला राशि: साझेदारी में लाभ, लेकिन तनाव से बचें. नवरात्रि फास्टिंग से सूर्य दोष मिटेगा, जीवन में शांति आएगी.
ग्रहण के बाद ये सरल उपाय अपनाएं – सूर्य देव प्रसन्न होंगे:
- सूर्य को जल अर्पण: सुबह सूर्योदय पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं, ‘ओम घृणि सूर्याय नमः’ का 108 बार जप करें.
- दान का महत्व: ग्रहण समाप्ति के बाद गेहूं, गुड़ और तांबे का दान करें। ये पितृ दोष और राहु प्रभाव को दूर करेगा.
- नवरात्रि कनेक्शन: ग्रहण की ऊर्जा को नवरात्रि में कैरी फॉरवर्ड करें – मां दुर्गा को लाल चंदन चढ़ाएं, मिलेगी असीम शक्ति.
- विशेष टिप: गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में तुलसी पत्र छूकर रखें, संतान को सूर्य जैसी तेज मिलेगी.
ज्योतिष के अनुसार ये अदृश्य ग्रहण सूर्य की कृपा का संकेत है. जो भक्त इसे अवसर मानेंगे, उनकी जिंदगी नवरात्रि की तरह रंगीन हो जाएगी.
ध्यान दें: चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, सूतक काल लागू नहीं – मंदिर खुले रहेंगे, पूजा-अर्चना सामान्य. लेकिन ज्योतिषीय प्रभाव सभी पर पड़ेगा. अधिक जानकारी के लिए अपने पंडित से संपर्क करें.