क्या देश में अब वोट देने का अधिकार भी सुरक्षित नहीं रह गया है? क्या चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था राजनीतिक दबाव में काम कर रही है? मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल उठाकर सियासी हलचल तेज कर दी है। शनिवार को खड़गे के आवास पर INDIA गठबंधन ने CEC के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR प्रक्रिया और कथित वोट चोरी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। खरगे ने CEC पर छह आरोप लगाते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक संस्था की गरिमा बचाने के लिए है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आम लोगों के वोट देने का अधिकार खतरे में है और विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं।
खरगे ने कहा कि सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “आज हम जो प्रस्ताव लाए हैं, उसका उद्देश्य एक संवैधानिक संस्था की गरिमा की रक्षा करना है। CEC के खिलाफ हमारी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। हमारा मकसद है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्ष होकर काम करे, ताकि आम आदमी का उस पर भरोसा बना रहे।”
खरगे ने आगे कहा कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। किसी व्यक्ति को कंप्यूटर के जरिए चुपके से मतदाता सूची से नाम हटाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए हर मुमकिन साजिश रची गई है। उन्होंने कहा कि सांसदों को तोड़ा गया, राजनीतिक पार्टियों को बिखेरा गया और सरकारें गिराई गईं।
खरगे ने इलेक्टोरल बॉन्ड, ED और CBI के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब वोट चोरी की जा रही है और इसके सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं।
खरगे ने ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ का हवाला देते हुए इस कानून पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कानून की वजह से ज्ञानेश कुमार को कथित तौर पर ऐसी गतिविधियां करने का मौका मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित करने के बाद यह कानून पास किया गया था। खड़गे ने इसे शर्मनाक और अपमानजनक बताते हुए आरोप लगाया कि यह कानून चुनाव आयुक्तों को जीवनभर के लिए सुरक्षा कवच देता है, जो भारत के राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को भी हासिल नहीं है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी खरगे ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ECI ने रातोंरात SIR की घोषणा कर दी और इसे पूरे देश में लागू किया गया। उनके मुताबिक, इसका असल मकसद BJP के विरोधियों के वोट हटाना था।
खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों का मुद्दा उठा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि वास्तविक और वैध मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की वकालत कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह प्रमुख आरोप लगाए:
1. चुनाव चोरी की साजिश: चुनावी प्रक्रिया में कथित तौर पर वोट चोरी की साजिश रची गई।
2. 13.2 करोड़ वोटरों के नाम हटाए: मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का आरोप लगाया।
3. फॉर्म-6 में बदलाव: संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में गैरकानूनी संशोधन किए जाने का आरोप।
4. ECINET के जरिए छेड़छाड़: ECINET के लिए मतदाता सूची में बदलाव किए जाने का आरोप।
5. मोदी-शाह के इशारे पर काम: CEC पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करने का आरोप।
6. दो अन्य आयुक्तों को बाहर रखा: चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों को फैसलों से अलग रखने का आरोप।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मीरा कुमार ने कहा कि INDIA गठबंधन एक बैठक बुलाएगा, जिसमें ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे यह प्रस्ताव पेश करेंगे और इसके बाद बयान भी देंगे।
मीरा कुमार ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका समेत दुनिया के कई देश भारतीय लोकतंत्र के मॉडल को देखते और उसका अनुसरण करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र चुनावों की ताकत से चलता है और इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में मतदाता होता है। अगर किसी एक मतदाता को भी वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। किसी को मतदान से रोकना लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है।
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