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लखनऊ प्रीमियर लीग की नीलामी पर सवालों का तूफ़ान…क्या लोकल क्रिकेटर्स के सपनों की हुई अनदेखी?

SYED MOHAMMAD ABBAS
Last updated: February 1, 2026 4:58 pm
SYED MOHAMMAD ABBAS
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लखनऊ। लखनऊ को क्रिकेट का शहर कहा जाता है-यहां सपने पलते हैं, खिलाड़ी गढ़े जाते हैं। लेकिन शनिवार को आयोजित लखनऊ प्रीमियर लीग (LPL) की नीलामी के बाद यही सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या ये लीग वाकई लखनऊ के खिलाड़ियों के लिए है?

ढोल-नगाड़ों और चमक-दमक के बीच हुई नीलामी के पीछे ऐसे कई सवाल सामने आए हैं, जिन्होंने शहर के क्रिकेट प्रेमियों की नींद उड़ा दी है।

Contents
लखनऊ। लखनऊ को क्रिकेट का शहर कहा जाता है-यहां सपने पलते हैं, खिलाड़ी गढ़े जाते हैं। लेकिन शनिवार को आयोजित लखनऊ प्रीमियर लीग (LPL) की नीलामी के बाद यही सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या ये लीग वाकई लखनऊ के खिलाड़ियों के लिए है?नीलामी में छाए बाहरी खिलाड़ी, लोकल टैलेंट हाशिये पर?

नीलामी में छाए बाहरी खिलाड़ी, लोकल टैलेंट हाशिये पर?

क्या लखनऊ प्रीमियर लीग लखनऊ के खिलाड़ियों के लिए ही नहीं है? फिर नीलामी में बाहरी खिलाड़ी क्यों छाए रहे? सी-डिवीजन के खिलाड़ी क्या सिर्फ़ नाम के लिए थे, जिन पर बोली तक नहीं लगी? पंजीकरण के नाम पर लिए गए 1000 रुपये क्या सिर्फ़ फीस थे, मौका नहीं? और सबसे बड़ा सवाल-मार्की प्लेयर आखिर किस आधार पर बनाए गए? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका शायद क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ के पास भी ठोस जवाब नहीं है।

सोशल मीडिया पर विरोध, क्लबों और कोचों ने उठाई आवाज़

इतना ही नहीं, लखनऊ प्रीमियर लीग की नीलामी को लेकर सोशल मीडिया पर भी ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है। क्रिकेट प्रेमी, खिलाड़ी और कोच खुलकर सवाल उठा रहे हैं और नीलामी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई स्थानीय क्लबों और क्रिकेट अकादमियों का आरोप है कि लोकल टैलेंट को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया, जबकि बाहरी खिलाड़ियों को तरजीह दी गई।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ ने इन आपत्तियों पर कोई संज्ञान लिया, या फिर खिलाड़ियों की आवाज़ एक बार फिर अनसुनी कर दी गई?

यूपी की राजधानी लखनऊ के लिए शनिवार का दिन काफ़ी अहम था। दरअसल, आईपीएल की तर्ज़ पर अब लखनऊ में भी लोकल लेवल पर लखनऊ प्रीमियर लीग के आयोजन की तैयारी है। इसी को लेकर लखनऊ में नीलामी आयोजित की गई। नीलामी में 6 टीमों ने 140 खिलाड़ी खरीदे। कुल 450 खिलाड़ियों की नीलामी में अधिकतम 1.25 लाख रुपये तक की बोली लगी। पैंथर्स-एसेज टीम ने 7.5 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बावजूद नीलामी को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, अभी तक इस पर खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है।

‘ये लखनऊ प्रीमियर लीग नहीं, बाहरी क्रिकेट लीग है’- हैदर रज़ा

दूसरी ओर, लखनऊ क्रिकेट डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष हैदर रज़ा ने यहां तक कह दिया कि “इसे लखनऊ प्रीमियर लीग मत कहिए जनाब, यह तो बाहरी क्रिकेट लीग है।” उन्होंने पूरी नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

हैदर रज़ा ने कहा कि लखनऊ प्रीमियर लीग की नीलामी में शहर के अधिकांश खिलाड़ियों को शामिल नहीं किया गया, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों के साथ सीधा अन्याय हुआ है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में आयोजित लीगों में बाहरी खिलाड़ियों को मौका नहीं दिया जाता, जबकि लखनऊ में बाहरी शहरों के खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी गई, जो शहर के क्रिकेट टैलेंट के साथ धोखा है।

उन्होंने आगे कहा कि यह तर्क दिया जा रहा है कि जो बाहर के खिलाड़ी लखनऊ के किसी क्लब से पंजीकृत हैं, उन्हें ही खिलाया जा रहा है। बाहर के खिलाड़ियों को अपने शहर की लीग में फ्रेंचाइज़ी के ज़रिये पैसा देकर खिलाने का कोई औचित्य नहीं है। यही खिलाड़ी लखनऊ की ओर से बाहर की प्रतियोगिताओं में भी भाग नहीं लेते, बल्कि अपने-अपने जिलों का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारी मांग है कि शहर के वे युवा खिलाड़ी, जिन्हें नीलामी में सी-ग्रेड श्रेणी में रखा गया था, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लीग में खेलने का मौका दिया जाए।

इस पूरे प्रकरण पर क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ का भी बयान सामने आया है। क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ के सचिव के.एम. खान ने इंडिया प्रेस हाउस से बातचीत में कहा कि लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। उन्होंने बताया कि समय की कमी के कारण सी-डिवीजन के खिलाड़ियों को लेकर फ्रेंचाइज़ियों से बातचीत की गई थी और उनसे कहा गया था कि वे अपनी पसंद के खिलाड़ी चुन लें। यदि कोई खिलाड़ी कॉमन होता, तो उसे नीलामी में शामिल किया जाता।

वहीं बाहरी खिलाड़ियों को लेकर के.एम. खान ने कहा कि कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो बाहर के होने के बावजूद लखनऊ में खेलते हैं और उसी आधार पर उनका चयन किया गया है।

हालांकि, उनके इस बयान के बावजूद क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ के कामकाज को लेकर कई क्रिकेट अकादमियों और क्लबों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। हालांकि क्रिकेट एसोसिएशन की सफ़ाई के बावजूद,
लखनऊ की कई क्रिकेट अकादमियों और क्लबों ने एसोसिएशन के कामकाज के ख़िलाफ़ खुलकर मोर्चा खोल दिया है।

अब देखना यह होगा कि क्या लखनऊ प्रीमियर लीग सच में लखनऊ के खिलाड़ियों की लीग बन पाएगी, या ये सवाल यूं ही गूंजते रहेंगे?

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