नई दिल्ली: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया की पहुंच सीमित करने को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है। जिस पहल की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया ने एक नीतिगत प्रयोग के तौर पर की थी, अब वही कई देशों में कानून का रूप लेती नजर आ रही है। ऑस्ट्रेलिया के बाद संयुक्त अरब अमीरात समेत 20 से अधिक देश बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने या इससे जुड़े नए नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत में भी इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के फैसले की सराहना की थी। इसके बाद यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि भविष्य में भारत भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर इसी तरह के नियमों पर विचार कर सकता है। हालांकि, फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
किन देशों में लागू हो चुके हैं नियम?
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के पांच देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध या कड़े नियम लागू किए जा चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले वर्ष दिसंबर से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर रोक लगाने का फैसला किया था। वहीं चीन में नाबालिगों के लिए वर्ष 2023 से ही सख्त नियम लागू हैं।
इसी क्रम में इंडोनेशिया ने इस वर्ष मार्च में नया कानून लागू किया, जबकि मलेशिया भी इसी तरह के नियम लागू कर चुका है। तुर्की इस वर्ष के अंत तक और संयुक्त अरब अमीरात अगले वर्ष से बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।
यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी बन रहे नए कानून
सोशल मीडिया पर बच्चों की पहुंच सीमित करने की दिशा में यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई देश भी सक्रिय हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम और ग्रीस वर्ष 2027 से, जबकि स्वीडन वर्ष 2028 से ऐसे नियम लागू करने की योजना बना रहे हैं।
इसके अलावा कनाडा और नॉर्वे भी इसी वर्ष नया कानून ला सकते हैं। वहीं जर्मनी, डेनमार्क, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्लोवेनिया, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन और इटली जैसे देशों में भी इस विषय पर गंभीर स्तर पर विचार किया जा रहा है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्यों बढ़ रही है चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके चलते अवसाद, चिंता, मोटापा, नींद से जुड़ी समस्याएं और पढ़ाई के दौरान ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी परेशानियां बढ़ने का खतरा रहता है।
प्रतिबंध का समर्थन करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया मंच मूल रूप से बच्चों के उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित नहीं किए गए थे। वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि बच्चे अन्य माध्यमों से भी इन मंचों तक पहुंच बना सकते हैं।
डिजिटल शिक्षा और अभिभावकों की भूमिका भी अहम
कई विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। इसके साथ डिजिटल शिक्षा, अभिभावकों की निगरानी और सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण तैयार करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि बच्चे इंटरनेट का जिम्मेदारी और सुरक्षित तरीके से उपयोग कर सकें।