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बंगाल में सियासी बवाल: क्या CM ममता बनर्जी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है?

नई दिल्ली। बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में राज्य का सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, तो दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने सियासी हलचल और तेज कर दी है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि ममता बनर्जी की गिरफ्तारी या राज्य सरकार को बर्खास्त किए जाने जैसी चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में सुनाई देने लगी हैं।

सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति क्यों बनी और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक खतरे की बात क्यों हो रही है। दरअसल, ईडी कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है, जिसकी आंच अब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं।

गुरुवार को ईडी की टीम ने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। इसी दौरान राज्य में सियासी बवाल देखने को मिला। हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद रेड के दौरान मौजूद रही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले ईडी उनकी पार्टी से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त करने की कोशिश कर रही है।

मामला आगे बढ़ता नजर आ रहा है, क्योंकि बीजेपी लगातार इस कार्रवाई को लेकर ममता सरकार पर हमलावर है। चुनाव से पहले ममता बनर्जी के लिए सियासी समीकरण बिगड़ते दिख रहे हैं। वहीं, ममता सरकार चुनाव आयोग पर भी हमलावर रुख अपनाए हुए है और एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी है।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह तलाशी कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी। एजेंसी का आरोप है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कार्रवाई में हस्तक्षेप किया और छापेमारी के समय कुछ ‘अहम सबूत’ कथित तौर पर हटवा दिए गए।

ईडी के मुताबिक, आई-पैक न सिर्फ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक परामर्श देता है, बल्कि पार्टी के आईटी और मीडिया ऑपरेशंस का भी प्रबंधन करता है। एजेंसी का दावा है कि आई-पैक के डायरेक्टर प्रतीक जैन तृणमूल कांग्रेस की आईटी सेल के प्रमुख भी हैं।

ममता बनर्जी की राजनीति अक्सर संघर्ष और विवाद से घिरी रही है। वह खुद को हमेशा केंद्र बनाम राज्य और बीजेपी बनाम बंगाल की लड़ाई में एक मजबूत नेता के रूप में दिखाती रही हैं।

ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को वह लंबे समय से “राजनीतिक बदले की कोशिश” बताती रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से पहले इस तरह की केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता ममता को “संघर्षशील नेता”की भूमिका निभाने का मौका देती है और वह इसे बंगाल की अस्मिता और संघीय मुद्दों को जोर देने के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं।

news desk

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