उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना में हुए बड़े वित्तीय घोटाले का सनसनीखेज खुलासा किया है. परिषद को प्राप्त आधिकारिक इनवॉइस दर्शाते हैं कि जिस कंपनी इन टैली स्मार्ट को पूर्वांचल व मध्यांचल में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का टेंडर दिया गया, वह एप्पलटोन और सानायीडर कंपनियों से मात्र ₹2,630 और ₹2,825 में मीटर खरीद रही है. इसके बावजूद उपभोक्ताओं से ₹6,016 प्रति मीटर वसूले जा रहे हैं, जबकि नियामक आयोग को ₹7,000–₹9,000 प्रति मीटर की लागत बताई गई—जो सीधे-सीधे 100% से अधिक की बढ़ोतरी और करोड़ों की अवैध वसूली है.
परिषद के अनुसार, जब टेंडर हुआ था, तब सिंगल फेज स्मार्ट मीटर की स्वीकृत दर लगभग ₹8,415 थी, जबकि आईटी सिस्टम की वास्तविक लागत ₹1,300 से अधिक नहीं हो सकती. इसी कारण केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ₹18,885 करोड़ की परियोजना यूपी में बढ़ाकर ₹27,342 करोड़ में टेंडर कर दी गई—यानी लगभग ₹8,500 करोड़ की संदिग्ध अतिरिक्त लागत.
सीबीआई जांच की मांग
परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसे “बेहद गंभीर वित्तीय अनियमितता” बताते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच अनिवार्य है. उनके अनुसार, प्राप्त इनवॉइस इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि मीटर वास्तविक कीमत से दोगुने से अधिक पर दिखाए जा रहे हैं, और प्रदेश के दो करोड़ उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ डालकर शोषित किया जा रहा है.
परिषद ने मांग की है कि ₹6,016 प्रति मीटर की वसूली तुरंत रोकी जाए, उपभोक्ताओं से ली गई अतिरिक्त राशि वापस की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए. परिषद ने चेतावनी दी कि यदि नियामक आयोग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विवाद का विषय बनेगा.