प्रयागराज/इलाहाबाद, 27 फरवरी – प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज POCSO मामले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद गिरफ्तारी पर तीन हफ्ते की रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि फिलहाल पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। पूर्ण अग्रिम जमानत पर फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में आएगा।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक पुलिस स्वामी जी से पूछताछ कर सकती है, लेकिन इस दौरान किसी तरह की जबरदस्ती या गिरफ्तारी नहीं होगी। यह अंतरिम राहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उनके एक सहयोगी को भी दी गई है। सुनवाई के दौरान शंकराचार्य की ओर से कहा गया कि उन पर लगे आरोप पूरी तरह झूठे और साजिश के तहत लगाए गए हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए वे नार्को टेस्ट जैसे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भी तैयार हैं। उनका दावा है कि यह पूरा मामला उनकी संस्था और सनातन परंपरा की छवि खराब करने की कोशिश है।
मामला क्या है?
यह पूरा मामला माघ मेला-2026 के दौरान सामने आया, जब दो नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए झूंसी थाना में POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट के आदेश पर यह एफआईआर दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार को हाईकोर्ट का रुख किया था।
आगे क्या होगा?
आज की सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अंतरिम राहत देते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया। अब सबकी नजरें मार्च के तीसरे हफ्ते पर टिकी हैं, जब कोर्ट यह तय करेगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पूर्ण अग्रिम जमानत मिलेगी या नहीं। तब तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी और पुलिस तय नियमों के तहत ही पूछताछ कर सकेगी।