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SBI ने पूछा — “सोना आखिर है क्या?” कमोडिटी या मनी, कहा- “सोने की पहचान तय किए बिना नहीं संभलेगी अर्थव्यवस्था ”

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2025: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक ऐसा सवाल उठा दिया है, जो भारत की आर्थिक सोच को नई दिशा दे सकता है — “सोना आखिर है क्या? Commodity या Money?”

मुंबई में हुए FICCI Capital Markets Conference के दौरान SBI चेयरमैन धीरज रेली ने कहा, “अब वक्त आ गया है कि भारत ये तय करे कि सोना गहनों की चीज़ है या असली पैसा. इस उलझन से हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अक्टूबर 2025 में $2,700 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं. भारत में भी सोने का आयात 1,200 टन तक जा पहुंचा है, जबकि गोल्ड लोन और निवेश में 15% तक गिरावट दर्ज की गई है.

सोने की पहचान का संकट और SBI की चेतावनी

SBI का मानना है कि जब तक भारत यह स्पष्ट नहीं करता कि सोना “वस्तु” है या “पैसा”, तब तक टैक्स, निवेश और गोल्ड मॉनेटाइजेशन जैसी नीतियां अधूरी ही रहेंगी. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, लेकिन भारी आयात के कारण हर साल करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ता जा रहा है. देश में करीब 80% सोना गहनों के रूप में खरीदा जाता है, जबकि शेष 20% निवेश के रूप में रखा जाता है.

दुनिया के कई देशों ने सोने पर अपनी स्पष्ट नीति तय की है. अमेरिका और यूरोप इसे “कमोडिटी” मानते हैं, जबकि चीन और स्विट्जरलैंड ने इसे “मनी” यानी रिज़र्व एसेट घोषित किया है. IMF भी इसे “मनी” की श्रेणी में रखता है, जबकि WTO इसे “कमोडिटी” मानता है — और भारत इसी दुविधा में फंसा हुआ है.

SBI का सुझाव है कि भारत को एक नेशनल गोल्ड पॉलिसी बनानी चाहिए, जो सोने को “स्ट्रैटेजिक एसेट” घोषित करे. साथ ही, Gold Monetization Scheme 2.0 लाई जाए, जिसमें 2.5% ब्याज और टैक्स छूट का प्रावधान हो. बैंक ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ब्लॉकचेन तकनीक से गोल्ड ट्रैकिंग शुरू की जाए ताकि पारदर्शिता बढ़े और काले धन पर लगाम लग सके.
SBI के मुताबिक, अगर भारत सोने को स्पष्ट रूप से “मनी” मान लेता है, तो CAD 1% तक घट सकता है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.
सवाल अब यह है — क्या सोना सिर्फ गहनों की चमक है, या भारत की अर्थव्यवस्था की ‘गोल्डन रीढ़’?

Gopal Singh

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