नई दिल्ली: टेक वर्ल्ड में इन दिनों एक नया शब्द चर्चा में है — “एआई वॉशिंग”। और यह शब्द दिया है Sam Altman ने। हाल ही में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के मौके पर मीडिया से बातचीत में ऑल्टमैन ने साफ कहा कि कंपनियां हर छंटनी का ठीकरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नहीं फोड़ सकतीं। उनके मुताबिक, कई मामलों में लेऑफ्स का असली कारण लागत घटाना, बिज़नेस री-स्ट्रक्चरिंग या महामारी के दौरान की गई जरूरत से ज्यादा भर्तियां हैं—न कि एआई।
उन्होंने कहा, “कुछ ‘एआई वॉशिंग’ जरूर हो रही है, जहां कंपनियां उन छंटनियों को भी एआई के नाम पर जस्टिफाई कर देती हैं, जो वे वैसे भी करने वाली थीं। हां, यह भी सच है कि एआई कुछ तरह की नौकरियों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन पूरी तस्वीर इतनी सीधी नहीं है।”
टेक सेक्टर में क्या चल रहा है?
2023 से 2025 के बीच टेक इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर छंटनियां हुईं। Amazon, IBM, Salesforce और HP जैसी बड़ी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। कई बार इन फैसलों के पीछे एआई को वजह बताया गया।
लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन छंटनियों की बड़ी वजह पोस्ट-पैंडेमिक ओवर-हायरिंग, स्लो होती ग्लोबल इकॉनमी और कॉस्ट कटिंग स्ट्रैटेजी रही है।
आगे क्या?
ऑल्टमैन ने माना कि एआई का असली असर अभी आना बाकी है। आने वाले समय में जॉब मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ नौकरियां खत्म होंगी, लेकिन नई तरह की नौकरियां भी पैदा होंगी। इसके लिए लोगों को नई स्किल्स सीखनी होंगी।
OpenAI के सीईओ के इस बयान ने बहस को और तेज कर दिया है—क्या कंपनियां एआई को “स्केपगोट” बना रही हैं, या फिर यह आने वाले बड़े बदलाव की सिर्फ शुरुआत है?
फिलहाल एक बात साफ है—एआई बदलाव ला रहा है, लेकिन हर छंटनी का अकेला जिम्मेदार नहीं है।