मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की उपस्थिति ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
मोहन भागवत का संबोधन
राष्ट्र निर्माण और एकता पर जोर “संघ की 100 साल की यात्रा: नए क्षितिज” विषय पर बोलते हुए मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का मूल उद्देश्य समाज के हर वर्ग को संगठित करना है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संघ किसी के विरोध में नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण और निस्वार्थ सेवा के पथ पर अग्रसर है। सलमान खान और डायरेक्टर सुभाष घई पूरे सत्र के दौरान दर्शकों की अगली कतार में मौजूद रहे।
संजय राउत का पलटवार
राजनीतिक और सुरक्षा दबाव का आरोप सलमान खान की इस शिरकत पर शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राउत ने इसे वैचारिक जुड़ाव के बजाय ‘दबाव और डर की राजनीति’ करार दिया।
राउत ने तर्क दिया कि सलमान खान को पिछले काफी समय से मिल रही धमकियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण उन्होंने संघ के मंच का रुख किया है। राउत ने सीधा हमला करते हुए कहा कि जब भी किसी फिल्मी हस्ती पर केंद्रीय एजेंसियों का दबाव होता है या सुरक्षा का संकट आता है, तो वे “सुरक्षा कवच” प्राप्त करने के लिए सत्ता पक्ष या उससे जुड़े संगठनों के करीब जाने का प्रयास करते हैं।
सितारों का लगा जमावड़ा
ये कार्यक्रम केवल सलमान खान तक सीमित नहीं था। संघ के शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां पहुंची थीं। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में अब तक कई चेहरे नजर आ चुके हैं: जिसमे शामिल है रणबीर कपूर, रणवीर सिंह , हेमा मालिनी, नीतेश तिवारी और ओम राउत
क्या हैं इसके राजनीतिक मायने?
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सलमान खान जैसी हस्ती का RSS के कार्यक्रम में शामिल होना एक बड़ा संदेश है। यह न केवल संघ की बदलती छवि और उसकी बढ़ावा को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कला और संस्कृति के क्षेत्र के लोग देश के सबसे बड़े संगठन के साथ वैचारिक संवाद के लिए तैयार हैं।