संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की विदेश नीति और आत्मनिर्भर रुख की जमकर सराहना की है. इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में भारत और रूस के बीच होने वाले समझौतों और यात्राओं की योजना पर भी जानकारी दी है.
लावरोव ने की भारत की विदेश नीति की जमकर तारीफ
भारत की तेल खरीद नीति पर पश्चिमी दबावों पर पूछे गये सवाल पर लावरोव ने कहा कि ‘हम भारत के राष्ट्रीय हितों का पूरा सम्मान करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन नीतियों के जरिए इन्हें आगे बढ़ा रहे हैं, हम उनका सम्मान करते हैं. भारत पूरी तरह सक्षम है कि वह खुद अपने फैसले ले सके.’
लावरोव ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए तेल आयात को लेकर शुल्क के बावजूद भारत-रूस की आर्थिक साझेदारी “खतरे में नहीं” है.
उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कहा है कि वह जो भी खरीदेगा, चाहे रूस से या किसी और देश से, वह उसका स्वतंत्र निर्णय होगा. लावरोव ने इसे भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक बताया.
दिसंबर में पुतिन करेंगे भारत-दौरा
लावरोव ने ऐलान किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत का दौरा करेंगे. इस यात्रा के दौरान व्यापार, सैन्य-तकनीकी सहयोग, वित्त, स्वास्थ्य सेवा, हाई-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. इसके अलावा दोनों देश एससीओ और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी अपने समन्वय को और मज़बूत करेंगे.
रणनीतिक संवाद को और गति देने री रहेगी कोशिश
रूसी विदेश मंत्री ने बताया कि हाल ही में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात चीन के तिआनजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी. अब दिसंबर की यात्रा के ज़रिए दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद को और गति मिलेगी.
लावरोव ने कहा कि इस साल विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस जाएंगे और वे स्वयं भी भारत आएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि
“हम भारत से यह नहीं पूछते कि उसके व्यापारिक संबंध कैसे होंगे या वह किससे तेल खरीदेगा. क्योंकि हम जानते हैं कि भारत अपने निर्णय लेने में पूरी तरह स्वतंत्र है.”
दशकों पुराने हैं भारत-रूस संबंध
लावरोव ने याद दिलाया कि रूस और भारत के रिश्ते दशकों से बने हैं और अब इन्हें विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी कहा जाता है. उनके मुताबिक, यही रिश्ते दोनों देशों को न केवल द्विपक्षीय स्तर पर बल्कि वैश्विक मंचों पर भी एक-दूसरे का भरोसेमंद साझीदार बनाते हैं.