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ISRO में ‘ब्रेन ड्रेन’ का रेड अलर्ट! गगनयान-चंद्रयान के 100 से ज्यादा टॉप साइंटिस्ट्स ने दिया इस्तीफा; सरकार ने लगाया ‘एग्जिट लॉक’

भारत के सबसे महत्वाकांक्षी स्पेस मिशन “गगनयान और चंद्रयान-3” को डिज़ाइन करने वाले 100 से ज्यादा टॉप-नॉच वैज्ञानिकों ने ISRO को अलविदा कह दिया है। इस अचानक हुए ‘टैलेंट ड्रेन’ से डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस “DoS” में हड़कंप मच गया है। डैमेज कंट्रोल के लिए प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए वैज्ञानिकों की एग्जिट विंडो पर कड़े नियम लागू कर दिए हैं।

मिशन गगनयान के बीच ‘इस्तीफों की झड़ी’

ISRO इस समय अपने अब तक के सबसे बड़े इंटरनल क्राइसिस से जूझ रहा है। एक तरफ देश अपने पहले ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन ‘गगनयान’ की लॉन्चिंग के लिए दिन-रात एक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कोर प्रोजेक्ट्स को लीड करने वाले सीनियर साइंटिस्ट्स सामूहिक रूप से संगठन छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में 100 से 120 सीनियर और एक्सपर्ट साइंटिस्ट्स इस्तीफा दे चुके हैं।

इन दो पावरहाउस सेंटर्स में लगी सबसे बड़ी दरार

URSC ‘यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर’: देश के सभी सैटेलाइट्स का डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग हब,यहाँ से करीब 80 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है।

VSSC ‘विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र’: रॉकेट टेक्नोलॉजी का गढ़। यहाँ से कम से कम 20 बड़े नाम बाहर निकल चुके हैं।

ऑटोनॉमी खत्म, DoS का कंट्रोल

इस इस्तीफों की चेन को ब्रेक करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस (DoS) ने 14 जुलाई को एक सख्त इंटरनल मेमोरेंडम जारी किया है, जिसने 2020 से चले आ रहे नियमों को बदल दिया है।

2020 का नियम: ग्रुप ‘A’ स्टाफ के इस्तीफे या VRS को सीधे सेंटर डायरेक्टर्स अपने स्तर पर ही मंजूर कर देते थे।

2026 का नया नियम: अब सेंटर डायरेक्टर्स के पास सीधे इस्तीफा मंजूर करने का अधिकार नहीं रहेगा।

नया एग्जिट प्रोसेस: हर इस्तीफे को सेंटर डायरेक्टर की रिकमेंडेशन के साथ सीधे डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस भेजा जाएगा।

फाइनल अथॉरिटी: वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने या न छोड़ने का अंतिम फैसला अब पूरी तरह से DoS के हाथ में होगा।

आगे की राह

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISRO के 14,600 से ज्यादा वर्कफोर्स में से 100 वैज्ञानिकों का जाना संख्या के लिहाज से 1% से भी कम है। लेकिन असली चुनौती नंबर्स की नहीं, बल्कि एक्सपर्टीज की है। गगनयान और चंद्रयान का सालों का कस्टमाइज्ड एक्सपीरियंस किसी नए रिक्रूट या जूनियर स्टाफ से रातों-रात रिप्लेस नहीं किया जा सकता। ISRO में 1,050 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया आखिरी दौर में है, लेकिन उन्हें इस लेवल पर आने में वक्त लगेगा।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है की ग्लोबल और डोमेस्टिक प्राइवेट स्पेस सेक्टर्स (Space Tech Startups) में मिल रहे भारी-भरकम पैकेज, स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) और कॉर्पोरेट फ्लेक्सिबिलिटी की वजह से सरकारी सिस्टम से टैलेंट का यह माइग्रेशन हो रहा है।

news desk

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