कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली से पहले विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से एकजुट होने की अपील की है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह मार्च किसी एक राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा, “पुलिस की चिंता मत करो, लाठियों की चिंता मत करो… डरने की जरूरत नहीं है।”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि रामलीला मैदान तक मार्च लोकतंत्र को बचाने, कथित वोट चोरी रोकने और संविधान की रक्षा के लिए है। उन्होंने इसे देश की आत्मा से जुड़ा आंदोलन बताते हुए उन सभी लोगों से शामिल होने की अपील की, जो लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से असहमत हैं, वे भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि यह किसी एक दल का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश का विरोध प्रदर्शन है।
कांग्रेस नेता ने राजनीतिक विचारधारा से अलग हटकर सभी छात्र संगठनों से मार्च में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को लगता है कि देश में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचारों की आजादी पर हमला हो रहा है, तो उन्हें इस मार्च में शामिल होना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान और भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी को एक साथ आना होगा। उन्होंने छात्रों से अपनी राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर भागीदारी करने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में प्रदर्शनकारियों से पुलिस और लाठियों को लेकर चिंता नहीं करने की बात कही। उन्होंने कहा कि संविधान और भारतीय राष्ट्र की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए और डरने की जरूरत नहीं है।
उनका यह बयान INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली से पहले आया है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। हालांकि, वोट चोरी से जुड़े आरोप विपक्ष के दावे हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित तथ्यों और चुनावी रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।
INDIA गठबंधन ने प्रस्तावित आंदोलन के लिए दो प्रमुख मांगें रखी हैं।
इन्हीं मांगों को लेकर विपक्ष ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इससे पहले 30 अक्टूबर को विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनता का महाभियोग लाने की पहल का भी ऐलान किया है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद राजनीतिक बहस का अहम मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष को आशंका है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जबकि इस तरह के आरोपों का आकलन चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों, आपत्तियों के निस्तारण और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।
रामलीला मैदान की प्रस्तावित रैली के जरिए INDIA गठबंधन इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। अब इस पर नजर रहेगी कि विपक्ष के इस आंदोलन में कौन-कौन से दल और छात्र संगठन शामिल होते हैं और चुनाव आयोग की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
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