नई दिल्ली: पद्मविभूषण संत रामभद्राचार्य के एक हालिया बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है. एक कार्यक्रम में उन्होंने हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की तुलना करते हुए कहा, ‘वाइफ’ और ‘पत्नी’ शब्दों का अंतर बताते हुए कहा कि ‘WIFE’ का अर्थ “Wonderful Instrument For Enjoy” होता है. उन्होंने आगे कहा, अंग्रेजी में “एंजॉयमेंट के लिए खिलौना है वाइफ.”
इसके बाद उन्होंने ‘पत्नी’ शब्द को संस्कृत से जोड़ते हुए कहा कि “यज्ञ में जो स्त्री अपने पति का साथ दे, वही पत्नी कहलाती है.” सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होते ही कई लोगों ने इसे महिला विरोधी और अपमानजनक बताया.
विवाद इस बात को लेकर और गहरा गया कि क्या ऐसे विचार व्यक्त करने वाले व्यक्ति को देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान—ज्ञानपीठ पुरस्कार—से सम्मानित किया जाना उचित था. कुछ लोगों ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रधानमंत्री पर भी सवाल उठाए कि “क्या इसी तरह के महिला-विरोधी विचारों के कारण उन्हें यह सम्मान दिया गया?”
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं को लेकर की जाने वाली इस तरह की टिप्पणियाँ समाज में गलत संदेश भेजती हैं और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए.