नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। सात चेक बाउंस मामलों में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्हें कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राजपाल यादव को 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बजाय उनके वकील ने अदालत में 50 लाख रुपये के ड्राफ्ट की कॉपी पेश की।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने नाराजगी जताई और पूछा कि जब अदालत ने 2 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था तो सिर्फ 50 लाख रुपये क्यों लाए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की जानकारी दी। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले दिए गए निर्देश के मुताबिक रकम जमा नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राजपाल यादव को अंतरिम राहत देते हुए भुगतान के लिए समय दिया था। 15 सितंबर को अदालत ने उन्हें 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का अंतिम मौका दिया था और उनकी अंतरिम सुरक्षा 5 अक्टूबर तक बढ़ाई थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जोयमाल्या बागची ने राजपाल यादव के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि लगातार भुगतान टालने के रवैये को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बेंच ने यह भी संकेत दिया कि अगर आदेशों का पालन नहीं किया गया तो राजपाल यादव की याचिका खारिज करने पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने भुगतान के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अगली कार्रवाई की चेतावनी दी।
यह पूरा मामला करीब 15 साल पुराना है। मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव को उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी थी। फिल्म के बाद रकम की वापसी को लेकर विवाद हुआ और भुगतान के लिए जारी किए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए।
इसके बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए। निचली अदालत और बाद में सेशंस कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा।
10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने सातों मामलों में भुगतान से जुड़ी रकम भी जमा करने का निर्देश दिया था। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके साथ रकम जमा करने की शर्त भी रखी थी। अब 5 अक्टूबर की सुनवाई में 2 करोड़ रुपये के बजाय सिर्फ 50 लाख रुपये का ड्राफ्ट पेश किए जाने के बाद कोर्ट ने उनके रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है।
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