‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया है। चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और आंतरिक फैसलों पर उठे सवालों के बीच अब खुद चुनाव आयोग ने मोर्चा संभाल लिया है। आयोग ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर सभी आरोपों का खंडन किया है और स्पष्ट किया है कि संस्था पूरी तरह संविधान के दायरे में रहकर काम करती है। आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग ने क्या कुछ सफाई दी है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली एक स्वतंत्र संस्था है, जहाँ आंतरिक चर्चा और विचार-विमर्श एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के सभी आधिकारिक फैसले पूरी कानूनी प्रक्रिया और ‘द चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स एक्ट, 2023’ के तहत ही लिए गए हैं।
आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में फैसले से पहले अलग-अलग राय या सुझाव आना स्वाभाविक है और सिर्फ कुछ आंतरिक नोट्स को उजागर करके बाकी फैसलों को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। पिछले 10 महीनों में आयोग ने लगभग 40 नई पहल और चुनाव सुधार किए हैं, जिसमें देशव्यापी ‘एसआईआर’ (Special Intensive Revision) भी शामिल है, इसके अलावा बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में सफल चुनाव कराए गए हैं। साथ ही, ECI के डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे ECINet) सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल पर काम करते हैं, और वोटर लिस्ट से जुड़े कार्य पूरी तरह कानूनी दायरे में किए जाते हैं।
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