महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ पर हुई एक गोपनीय बैठक ने सियासी समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस बैठक में जयंत पाटिल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे शामिल रहे। करीब एक घंटे तक चली इस बंद कमरे की बैठक के एजेंडे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बदले संकेत
सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरद गुट) केंद्र सरकार द्वारा दोबारा पेश किए जाने वाले महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन कर सकती है।
गौरतलब है कि पिछली बार संसद में इस बिल पर मतदान के दौरान पार्टी ने विरोध का रुख अपनाया था, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों और भाजपा नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद पार्टी के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
मानसून सत्र में अहम हो सकता है फैसला
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है। इसी दौरान केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को दोबारा पेश करने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि एनसीपी (शरद गुट) इस बार सरकार का समर्थन कर सकती है, जिससे बिल के पारित होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पिछली बार क्यों अटक गया था विधेयक?
लोकसभा में पिछली बार यह संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया था। यही वजह रही कि यह बिल पारित नहीं हो सका। अब केंद्र सरकार इसे नए राजनीतिक समीकरणों के साथ दोबारा पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है।
क्या पार्टी टूट रोकने की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संभावित समर्थन केवल विधेयक तक सीमित रणनीतिक कदम भी हो सकता है। इसके पीछे पार्टी के भीतर संभावित टूट को रोकने की कोशिश भी मानी जा रही है।हाल के दिनों में एनसीपी (शरद गुट) के कुछ सांसदों के भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क में होने की चर्चाएं तेज रही हैं।
फडणवीस की भूमिका पर भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मुद्दे पर शरद पवार गुट से संपर्क साधा था। इसी के बाद समर्थन को लेकर सहमति बनने की अटकलें तेज हुई हैं।हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
महाराष्ट्र की इस सियासी हलचल के बीच अब सभी की नजरें संसद के मानसून सत्र पर टिकी हैं। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े इस विधेयक पर एनसीपी (शरद गुट) का अंतिम रुख क्या होगा, यह तभी स्पष्ट होगा जब बिल सदन में पेश होगा।