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‘सुशासन सरकार’ के मंत्रियों पर पीके ने लगाए गंभीर आरोप, नीतीश कुमार की चुप्पी पर उठ रहे सवाल!

जिस राज्य में अगले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव का ऐलान होने वाला हो, वहां अगर सरकार के मंत्री और सत्ताधारी दल के नेता पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगें, तो राजनीतिक तूफान खड़ा होने में देर नहीं लगती.

ऐसा ही तूफान इन दिनों बिहार की राजनीति में महसूस की जा रही है. बीजेपी के पूर्व रणनीतिकार और जेडीयू के पूर्व नेता पीके यानी प्रशांत किशोर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. आरोप भले ही अशोक चौधरी और सम्राट चौधरी पर लग रहे हों लेकिन सवाल खड़े हो रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी पर.

क्या हैं पीके के आरोप?

प्रशांत किशोर का दावा है कि सरकार के भीतर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्तासीन नेताओं की मनमानी अपने चरम पर है.

अशोक चौधरी पर लगे आरोप – पीके ने अशोक चौधरी पर आरोप लगाया कि वो बेनामी जमीन खरीदे, इनकम टैक्स से बचने की कोशिश की, अपने दामाद के ट्रस्ट के जरिए 200 करोड़ की जमीन खरीदी. हालांकि अशोक चौधरी ने पीके के आरोपों को खारिज कर दिया.

सम्राट चौधरी पर लगे आरोप – पीके ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी ने अपना नाम बदला पहले उनका नाम राकेश कुमार था. उन्होने मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं की तो आगे की डिग्री कैसे ली. यहां तक की पीके ने ये भी आरोप लगाया कि 1998 में कांग्रेस नेता सदानंद सिंह की हत्या मामले में सम्राट चौधरी जेल भी गए थे लेकिन खुद को नाबालिग बताकर वो जेल से बाहर आ गए.
दिलीप जायसवाल पर लगे आरोप – पीके ने बिहार बीजेपी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर भी टेंडर में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.

हालांकि पीके के आरोपों को इन सभी नेताओं ने खारिज कर दिया. राजनीति में ये आम चलन भी है कि जिस पर आरोप लगता है वो अपने आरोपों को खारिज कर देता है. आरोप सच्चे हैं या झूठे ये तो जांच से पता चलता है. लेकिन इन मामलों की जांच होगी ये भी बड़ा सवाल है. साथ ही सवाल उठ रहे हैं बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर. नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति में ‘सुशासन बाबू’ कहा जाता रहा है. उनकी छवि भी बेदाग और ईमानदार नेता की ही रही है. लेकिन उनकी ही सरकार के मंत्रियों पर इतने गंभीर आरोप लगने पर नीतीश कुमार चुप हैं.

फिलहाल नीतीश कुमार की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार के मंत्रियों पर लग रहे इन आरोपो से ये तो साफ है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति और तीखी होने जा रही है.

news desk

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