प्रिस्टिना: कभी कोसोवो की आजादी की लड़ाई में हथियार उठाने वाले और बाद में देश के राष्ट्रपति बनने वाले हाशिम थाची अब युद्ध अपराध के मामले में 25 साल की जेल की सजा भुगतेंगे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें हत्या, प्रताड़ना, क्रूर व्यवहार और लोगों को मनमाने तरीके से हिरासत में रखने जैसे युद्ध अपराधों का दोषी ठहराया है। करीब छह साल पहले इन्हीं आरोपों का सामना करने के लिए थाची ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था।
कोसोवो की राजधानी प्रिस्टिना में हजारों लोगों ने बड़ी स्क्रीन पर अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देखा। जैसे ही सजा सुनाई गई, वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। अदालत में थाची फैसला सुनाए जाने के दौरान शांत खड़े रहे। उनके चेहरे के भावों से उनके मन की स्थिति का अंदाजा लगाना आसान नहीं था।
अदालत के फैसले के बाद कोसोवो में थाची के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। हेग स्थित अदालत के पास एक पार्क में जुटे समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की डच दंगा-रोधी पुलिस के साथ मामूली झड़प भी हुई। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया।
कोसोवो के विदेश मंत्री ग्लाउक कोनजुफ्का ने फैसले को देश और कोसोवो के मुक्ति संग्राम के लिए भयानक बताया। वहीं, थाची और उनके सहआरोपियों के समर्थक उन्हें आज भी कोसोवो की आजादी की लड़ाई के नायकों के तौर पर देखते हैं।
अदालत ने थाची के साथ काद्री वेसेली, रेचेप सेलिमी और जाकुप क्रास्निकी को मानवता के खिलाफ अपराधों के छह आरोपों से बरी कर दिया। जजों ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि ये अपराध आम नागरिकों के खिलाफ किसी व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थे।
हालांकि, युद्ध अपराधों के मामलों में अदालत ने चारों को दोषी पाया। मामले में 385 लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में रखने, 49 लोगों के साथ क्रूर व्यवहार करने, 303 बंदियों को यातना देने और 96 लोगों की हत्या से जुड़े आरोप शामिल थे।
सजा के तौर पर हाशिम थाची को 25 साल, काद्री वेसेली को 18 साल, रेचेप सेलिमी को 13 साल और जाकुप क्रास्निकी को 25 साल जेल की सजा सुनाई गई।
हाशिम थाची उस दौर में कोसोवो की आजादी की लड़ाई के प्रमुख चेहरों में शामिल थे, जब कोसोवो सर्बिया का एक प्रांत था। आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं का उन्होंने नेतृत्व किया। गुरिल्ला रणनीति में माहिर माने जाने वाले थाची सर्बियाई सुरक्षा बलों से बच निकलने में कामयाब रहते थे। इसी वजह से उन्हें ‘द स्नेक’ उपनाम मिला।
जब कोसोवो में स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू हुई, तब थाची छात्र थे। वह स्विट्जरलैंड में अपने राजनीतिक निर्वासन से लौटे और संघर्ष में शामिल हो गए। उन्होंने तब तक हार नहीं मानी, जब तक कोसोवो की आजादी की लड़ाई निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंच गई।
1999 में फ्रांस में हुई शांति वार्ता में भी थाची को आमंत्रित किया गया था। उस समय पश्चिमी देशों के बीच उन्हें ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता था, जो कोसोवो को आजादी की दिशा में आगे ले जा सकते हैं। कोसोवो की जंग में करीब 13 हजार लोगों की मौत हुई थी।
युद्ध खत्म होने के बाद थाची ने राजनीति का रास्ता चुना और धीरे-धीरे कोसोवो की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे। वह देश के प्रधानमंत्री बने और बाद में राष्ट्रपति पद भी संभाला।
हालांकि, युद्ध के दौर से जुड़े आरोपों ने उनके राजनीतिक सफर को पूरी तरह बदल दिया। सरकारी वकीलों ने अदालत में दिए गए कुछ बयानों के आधार पर दावा किया था कि कोसोवो लिबरेशन आर्मी के दौर में थाची और अन्य आरोपियों ने राजनीतिक विरोधियों तथा उन नागरिकों को निशाना बनाया, जिन्हें वे अपने विरोधी मानते थे।
इन्हीं आरोपों के कारण कभी आजादी की लड़ाई के प्रमुख चेहरे रहे थाची को बाद में अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपने युद्धकालीन रिकॉर्ड का जवाब देना पड़ा।
करीब तीन साल तक चले मुकदमे की सुनवाई के अंतिम दिन फरवरी में थाची ने जजों के सामने कहा था कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कोसोवो की स्वतंत्रता, जीवन और गरिमा की रक्षा में लगा दिया। उनका कहना था कि युद्ध के दौरान लिए गए उनके फैसले देश की आजादी की लड़ाई के हित में थे।
थाची ने यह भी कहा था कि वह हमेशा पश्चिमी लोकतंत्र, समानता और न्याय के सिद्धांतों से प्रेरित रहे। हालांकि, अदालत ने युद्ध अपराधों से जुड़े आरोपों में उन्हें दोषी ठहराया।
राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद थाची को अपने पुराने युद्धकालीन रिकॉर्ड से जुड़े आरोपों का सामना करने के लिए हेग की अदालत जाना पड़ा। एमनेस्टी इंटरनेशनल की यूरोप के लिए उप क्षेत्रीय निदेशक एस्थर मेजर ने कहा कि इन दोषसिद्धियों से यह संदेश जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी भी कानून से ऊपर नहीं हैं।
फैसले के दौरान थाची शांत रहे, जबकि उनके तीनों सहआरोपियों ने आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताते हुए इसे साजिश करार दिया।
अदालत के फैसले के बाद थाची और अभियोजन पक्ष, दोनों के पास अपील करने का विकल्प है। अभियोजन पक्ष ने थाची के लिए इससे भी कड़ी सजा की मांग की थी।
फैसले के बाद कोसोवो में थाची के समर्थकों के बीच निराशा देखने को मिली। कभी बंदूक के साथ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले, फिर देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनने वाले थाची का सफर अब 25 साल की जेल की सजा तक पहुंच गया है। उनके समर्थक उन्हें आज भी स्वतंत्रता संग्राम के नायक के तौर पर देखते हैं, जबकि अदालत का फैसला उनके युद्धकालीन रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर अपराधों पर आया है।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ इंसानों की भाषा समझने और उसका जवाब देने तक…
सना: यमन के हूती विद्रोही एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष के केंद्र में हैं। कभी…
नई दिल्ली: UPI से पैसे भेजना आज इतना आसान हो गया है कि QR कोड…
प्रयागराज: दुनिया में पक्षियों की अनगिनत प्रजातियां हैं और हर एक की अपनी खासियत है।…
चेन्नई: साल 1960 में चेन्नई के किलपॉक मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद…
नई दिल्ली: इस मानसून में दिल्ली का मौसम आसपास के राज्यों से बिल्कुल अलग रहा।…