आज के समय में कई युवा फोन पर बात करने से बचते हैं। अगर किसी का कॉल आ जाए तो वे पहले सोचते हैं कि क्या मैसेज से जवाब दिया जा सकता है। इस आदत को कई लोग “टेलीफोबिया” Telephobia से जोड़ते हैं। टेलीफोबिया का मतलब है फोन पर बात करने को लेकर घबराहट या डर महसूस होना।
हालांकि हर व्यक्ति जो कॉल से बचता है, उसे टेलीफोबिया नहीं होता। कई बार यह सिर्फ एक पसंद होती है। लेकिन अगर फोन बजते ही घबराहट होने लगे, कॉल करने से पहले बार-बार सोचना पड़े या जरूरी कॉल भी टाल दी जाए, तो यह टेलीफोबिया का संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, Gen Z यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी डिजिटल दुनिया में बड़ी हुई है। इसलिए उनके लिए चैट करना ज्यादा सहज होता है। इसके पीछे कई कारण हैं:
अगर यह डर बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर असर पड़ सकता है। इंटरव्यू, ऑफिस मीटिंग, बैंक या डॉक्टर से बात करने जैसी जरूरी कॉल भी लोग टालने लगते हैं। इससे आत्मविश्वास कम हो सकता है और कई जरूरी मौके भी छूट सकते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धीरे-धीरे छोटी कॉल से शुरुआत करें। पहले परिवार या करीबी दोस्तों से फोन पर बात करें। कॉल से पहले जरूरी बातें लिख लें और रोज थोड़ा अभ्यास करें। अगर डर बहुत ज्यादा हो और सामान्य जीवन प्रभावित होने लगे, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
टेक्स्ट करना आसान लगना आज की डिजिटल पीढ़ी की सामान्य आदत हो सकती है। लेकिन अगर फोन पर बात करने का डर इतना बढ़ जाए कि जरूरी काम भी रुकने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही अभ्यास और समय पर मदद से इस डर पर काबू पाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों में 51% भारतीयों ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर जताया सबसे ज्यादा भरोसा…
राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर चल रहा हड़कंप…
मुंबई। मुंबई के भायखला इलाके से एक बेहद चौंकाने वाली और रोंगटे खड़े कर देने…
ग्लोबल इकोनॉमी के स्लोडाउन और मार्केट के हर चैलेंज को क्रैक करते हुए देश के…
Highlights: BCCI C.O.E हाई परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग कैंप 2026-27 के लिए चुने गए उत्तर प्रदेश के…
शाहीबाग इलाके में शादी के बाद से ही पीड़िता को दी जा रही थीं अमानवीय…