लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली (OPS), निजीकरण की समाप्ति और शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग को लेकर ‘अटेवा पेंशन बचाओ मंच’ ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
सोमवार को अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में हुई एक हाई-लेवल ऑनलाइन बैठक में आगामी चरणबद्ध आंदोलन और ‘जनजागरण यात्रा’ के तारीखों की घोषणा की गई।
अटेवा ने साफ किया है कि इस बार लड़ाई सिर्फ पुरानी पेंशन की नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की नौकरी बचाने की भी है।
अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने बैठक में चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रूपरेखा सामने रखी, जो इस प्रकार है:
11 जून 2026 (सुबह 11:00 बजे): लखनऊ के ऐतिहासिक ‘काकोरी’ में शहीदों को नमन कर जनजागरण यात्रा का शंखनाद होगा। यह यात्रा विभिन्न ब्लॉकों और जिलों से होकर गुजरेगी।
10 जुलाई से 15 अगस्त: सभी ब्लॉकों और जिलों में जनजागरण गोष्ठी और बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा।
29 अगस्त: प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल ‘तिरंगा यात्रा’ निकाली जाएगी (नोट: पूर्व प्रस्तावित शांति मार्च की जगह अब तिरंगा यात्रा होगी)।
25 सितंबर: राजधानी लखनऊ में शिक्षकों और कर्मचारियों की एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा।
अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:
“आज बढ़ते निजीकरण के कारण सरकारी नौकरियां लगातार कम हो रही हैं। इसके ऊपर से TET की अनिवार्यता लागू करने से लाखों सेवारत शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। बुढ़ापे में पुरानी पेंशन न मिलने से रिटायर्ड कर्मचारी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। अब सरकार को इस पर बड़ा दिल दिखाना ही होगा।”
बैठक में अटेवा के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी शिक्षकों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया:
कार्य का बोझ: प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आशाराम और चंद्रहास सिंह ने कहा कि शिक्षकों से बीएलओ (BLO), जनगणना से लेकर तमाम प्रशासनिक काम लिए जा रहे हैं। इन सबके बीच वे बच्चों को भी पढ़ा रहे हैं। ऐसे में बुढ़ापे में उनसे TET पास करने की शर्त रखना पूरी तरह अन्याय है।
अर्धसैनिक बलों की पेंशन: प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने मांग की कि देश की सीमा पर सेवा कर रहे अर्धसैनिक बलों के लिए भी पुरानी पेंशन तुरंत बहाल की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया और सांस्कृतिक विंग: आईटी सेल के प्रभारी सूफियान अहमद और कुलदीप सैनी ने सोशल मीडिया पर इस अभियान को तेज करने की अपील की। वहीं, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के धर्मेंद्र गोयन और सुमन कुरील ने बताया कि आंदोलन को धार देने के लिए विशेष प्रेरक गीत तैयार किए गए हैं।
इस ऑनलाइन बैठक में रंजना सिंह, ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, विजय प्रताप बुढ़नपुरी, नरेन्द्र कुमार और अशोक कन्नौजिया सहित प्रदेश, मंडल और जिला स्तर के सैकड़ों पदाधिकारी शामिल हुए।
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