अमेरिकी सेना ने हाई-एनर्जी लेजर हथियारों को प्रयोगशाला से निकालकर वास्तविक ऑपरेशनल इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। अमेरिका ने अपनी दक्षिणी सीमा पर कथित ड्रग कार्टेल से जुड़े तीन ड्रोन को हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम से मार गिराने की पुष्टि की है। इसके अलावा अमेरिकी सेना ने Enduring High Energy Laser यानी E-HEL सिस्टम के उत्पादन के लिए करीब 464.8 मिलियन डॉलर का अनुबंध किया है। इससे संकेत मिलता है कि ड्रोन रोधी लेजर तकनीक अब सिर्फ परीक्षण का हिस्सा नहीं रह गई है, बल्कि इसे सैन्य तैनाती के लिए तैयार किया जा रहा है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक अगस्त 2026 में अमेरिका-मेक्सिको सीमा के पास तीन ड्रोन को Army Multipurpose High Energy Laser सिस्टम से नष्ट किया गया। इन ड्रोन के बारे में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उनके कार्टेल से जुड़े होने का संदेह था। अमेरिकी उत्तरी कमान ने इस कार्रवाई की पुष्टि की, हालांकि उसने ड्रोन के सटीक स्थान या कथित कार्टेल की पहचान सार्वजनिक नहीं की।
यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार लेजर सिस्टम के इस्तेमाल को सिर्फ परीक्षण के बजाय वास्तविक सुरक्षा अभियान के संदर्भ में सार्वजनिक रूप से सामने रखा गया है।
2 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने AeroVironment को 464.8 मिलियन डॉलर का E-HEL उत्पादन अनुबंध दिया। अमेरिकी सेना के अनुसार यह हाई-एनर्जी लेजर हथियार प्रणाली के लिए उसका पहला उत्पादन अनुबंध है।
E-HEL को खास तौर पर ड्रोन जैसे हवाई खतरों से निपटने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पारंपरिक इंटरसेप्टर की तरह हर लक्ष्य के लिए अलग मिसाइल की जरूरत नहीं होती। सिस्टम की ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध रहने तक इसकी ‘मैगजीन’ को दोबारा तैयार किया जा सकता है।
यानी अमेरिकी सेना अब ऐसी एयर डिफेंस तकनीक विकसित कर रही है जिसमें एक महंगे इंटरसेप्टर को खर्च करने के बजाय ऊर्जा का इस्तेमाल करके लगातार कई ड्रोन लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सके।
हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम लक्ष्य पर अत्यधिक केंद्रित ऊर्जा की किरण डालता है। लगातार कुछ समय तक लक्ष्य पर ऊर्जा केंद्रित रहने से उसकी महत्वपूर्ण सतह, सेंसर या संरचनात्मक हिस्से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
इस तकनीक की एक खासियत यह है कि लेजर प्रकाश की गति से लक्ष्य तक पहुंचता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में कोई भी ड्रोन या मिसाइल आसानी से नष्ट हो जाएगी। लक्ष्य की दूरी, वातावरण, मौसम, सिस्टम की शक्ति और लक्ष्य की संरचना जैसे कई कारक इसकी प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।
लेजर हथियारों को लेकर अमेरिकी सेना का प्रमुख आकर्षण कम लागत वाला प्रति-शॉट और लगातार इस्तेमाल की क्षमता है। अमेरिकी सेना E-HEL को इसी वजह से scalable और affordable directed-energy capability के तौर पर पेश कर रही है।
पारंपरिक एयर डिफेंस में हर इंटरसेप्टर के इस्तेमाल के बाद नया मिसाइल स्टॉक चाहिए। इसके मुकाबले लेजर सिस्टम में मुख्य आवश्यकता पर्याप्त विद्युत शक्ति और सिस्टम की ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने की होती है।
यही वजह है कि बड़ी संख्या में आने वाले छोटे ड्रोन के खिलाफ लेजर तकनीक को भविष्य की बहुस्तरीय एयर डिफेंस व्यवस्था का संभावित हिस्सा माना जा रहा है।
E-HEL से जुड़ी रिपोर्टों में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि LOCUST X3 सिस्टम के संचालन में Xbox कंट्रोलर जैसे गेमिंग कंट्रोलर का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक इसका उद्देश्य ऑपरेटर इंटरफेस को सहज और परिचित बनाना है।
यह तरीका महंगे और पूरी तरह कस्टम कंट्रोल सिस्टम पर निर्भरता कम करने के साथ ऑपरेटर ट्रेनिंग को भी आसान बना सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ड्रोन और मिसाइलों का खतरा अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरानी ड्रोन और मिसाइल ठिकानों के खिलाफ कई सैन्य कार्रवाई की हैं। जुलाई में CENTCOM ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों लक्ष्यों के खिलाफ हवाई और समुद्री प्लेटफॉर्म से हमले की जानकारी दी थी।
हालांकि, होर्मुज में लेजर सिस्टम से ईरानी ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों को नियमित रूप से मार गिराने के दावे की स्वतंत्र और स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है। इसलिए फिलहाल इसे स्थापित तथ्य के बजाय रिपोर्टेड दावा मानना ज्यादा उचित है।
फिर भी अमेरिकी रक्षा विभाग ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ हाई-एनर्जी लेजर क्षमता पर तेजी से काम कर रहा है। जुलाई में Pentagon ने Lockheed Martin और nLight के साथ ऐसे लेजर सिस्टम विकसित करने के लिए शुरुआती अनुबंधों की घोषणा की थी, जिनका लक्ष्य भविष्य में ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से निपटना है।
लेजर हथियारों को लेकर तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। इस तकनीक के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं।
धूल, धुआं, बारिश और धुंध जैसी वायुमंडलीय परिस्थितियां लेजर बीम की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा हाई-पावर सिस्टम के लिए पर्याप्त बिजली और प्रभावी कूलिंग सिस्टम जरूरी होता है।
इसका मतलब है कि लेजर हथियार पारंपरिक मिसाइल सिस्टम को तुरंत पूरी तरह बदलने के बजाय फिलहाल बहुस्तरीय एयर डिफेंस की एक अतिरिक्त परत के रूप में ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं।
यूक्रेन से लेकर मध्य पूर्व तक युद्ध में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ी है। बड़ी संख्या में छोटे और अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन अगर एक साथ हमला करते हैं तो हर लक्ष्य पर महंगी इंटरसेप्टर मिसाइल इस्तेमाल करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यहीं लेजर तकनीक की उपयोगिता सामने आती है। अमेरिकी सेना का E-HEL कार्यक्रम इसी समस्या के समाधान की दिशा में एक कदम है। उत्पादन अनुबंध मिलने के साथ अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि directed-energy weapons को अब भविष्य की अवधारणा के बजाय वास्तविक सैन्य क्षमता में बदलने की कोशिश तेज हो चुकी है।
अमेरिका का मौजूदा कदम सिर्फ एक नए हथियार की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की ओर संकेत करता है जिसमें महंगे इंटरसेप्टर के मुकाबले ऊर्जा आधारित हथियारों को बड़े पैमाने पर ड्रोन खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
दक्षिणी सीमा पर वास्तविक ऑपरेशनल इस्तेमाल और E-HEL के लिए करीब 465 मिलियन डॉलर का उत्पादन अनुबंध इस बदलाव के दो अलग-अलग संकेत हैं। आने वाले वर्षों में इन सिस्टम की क्षमता, रेंज और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तैनाती बढ़ती है या नहीं, यह तय करेगा कि लेजर हथियार आधुनिक एयर डिफेंस में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
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