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राज्यसभा नामांकन के बाद भावुक हुए जदयू नेता, नीतीश बोले— “बिहार छोड़कर कहीं नहीं जा रहा”

पटना में शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधानमंडल दल की अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने राज्यसभा नामांकन को लेकर पार्टी नेताओं और विधायकों को भरोसा दिलाया कि वे बिहार की राजनीति से दूर नहीं जा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिहार को छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है और वे आगे भी यहीं रहकर विकास और सरकार से जुड़े कामों पर नजर रखते रहेंगे।

बैठक के दौरान जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा के बारे में बात की तो कई विधायक, मंत्री और पार्टी नेता भावुक हो गए। माहौल इतना भावुक हो गया कि कुछ नेताओं की आंखें भी नम हो गईं। इस पर नीतीश ने मुस्कुराते हुए कहा, “चिंता मत कीजिए, मैं बिहार में भी रहूंगा। मैं हूं ना… किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। विकास के काम भी चलते रहेंगे और आपकी समस्याओं का समाधान भी होता रहेगा।”

बैठक में जदयू के सभी विधायक, सांसद, विधान पार्षद और मंत्री मौजूद थे। दरअसल, गुरुवार को नीतीश कुमार ने जदयू उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। करीब दो दशक बाद यह कदम बिहार की राजनीति में उनके एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है। लेकिन नामांकन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच कुछ असमंजस की स्थिति बन गई थी, जिसे दूर करने के लिए यह बैठक बुलाई गई।

बैठक के बाद मंत्री श्रवण कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि वे किसी को छोड़कर नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप लोगों को हम छोड़ नहीं रहे हैं, आपके बीच ही रहेंगे। उनकी इच्छा थी कि वे राज्यसभा जाएं, इसलिए नामांकन किया है। लेकिन वे हमेशा पार्टी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।”

इसी बैठक में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने एक और बड़ा प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाया जाए। इस प्रस्ताव पर बैठक में मौजूद नेताओं ने सहमति जताई। जानकारी के मुताबिक निशांत कुमार शनिवार को औपचारिक रूप से जदयू में शामिल होंगे और इसके बाद वे बिहार का दौरा भी शुरू करेंगे।

बैठक में कई नेताओं ने नीतीश कुमार के फैसले का समर्थन किया। हालांकि राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, लेकिन जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने साफ किया कि बैठक में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह कदम भाजपा के साथ गठबंधन की राजनीति में संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। वहीं निशांत कुमार की एंट्री को जदयू में नई पीढ़ी के नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है।

पिछले दो दिनों से जदयू कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर इकट्ठा होकर ‘नीतीश भैया बिहार में रहो’ जैसे नारे लगा रहे थे। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो आमरण अनशन की चेतावनी तक दे दी थी। ऐसे में नीतीश कुमार के इस भरोसे ने कार्यकर्ताओं की चिंता काफी हद तक दूर कर दी है।

news desk

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