‘चिराग’ बुझाकर ‘लालटेन’ जलाने की नीतीश की नई रणनीति
बिहार की सियासत को लेकर तमाम विरोधाभास हो सकता है लेकिन जिस एक लाइन पर सबकी सहमति है, वो ये कि आज भी बिहार की राजनीति का केन्द्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही हैं. नीतीश कुमार के बारे में एक और बात यहां कही जाती है कि ‘नीतीश कभी कुछ भी भूलते नहीं है, और किसी भी दांवपेंच का कोई उधार भी नहीं रखते हैं’.
बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की एक रणनीति के बारे में खूब चर्चा हो रही है. वो रणनीति जिसके पीछे 2020 का उधार चुकाने की बात कही जा रही है. बिहार की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार अब उस ‘घाव’ का बदला ले रहे हैं जो 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने दिया था.
2020 का बदला 2025 में ?
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने एनडीए से अलग होकर अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया था. तब पार्टी ने बीजेपी के बजाय मुख्य रूप से जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए थे. चिराग ने खुद को “मोदी का हनुमान” बताते हुए बीजेपी का खुला समर्थन किया, लेकिन जेडीयू के खिलाफ हर सीट पर मोर्चा खोल दिया. नतीजा यह हुआ कि लोजपा ने लगभग 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें से करीब 122 सीटों पर जेडीयू मैदान में थी.
इन मुकाबलों में लोजपा उम्मीदवारों ने 5,000 से लेकर 15,000 तक वोट काटे, जिससे जेडीयू को करीब 25-30 सीटों का सीधा नुकसान हुआ था. जेडीयू 71 (2015) से घटकर सिर्फ 43 सीटों पर सिमट गई थी.
‘तीर’ ही ‘लालटेन’ है!
2025 के चुनाव में तस्वीर बदली हुई है. इस बार लोजपा (रामविलास) एनडीए के साथ मिलकर 29 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. अब सूत्रों की माने तो, जेडीयू के स्थानीय कार्यकर्ता पूरी कोशिश में हैं कि इन सीटों पर लोजपा को हर हाल में नुकसान पहुंचे.
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी का कहना है कि ‘2020 में जब चिराग पासवान चुनाव लड़ रहे थे तो उनके कार्यकर्ता कह रहे थे कि भाजपा ही लोजपा है, लोजपा ही भाजपा है. इस बार मौका मिला है तो नीतीश कुमार के कोर वोटर ये बात भूल जायेंगे?’
माना जा रहा है कि 2020 की तर्ज पर इस बार उन 29 सीटों पर जहां चिराग पासवान की पार्टी के उम्मीदवार हैं वहां जेडीयू के कार्यकर्ता नारा दे रहे हैं कि ‘तीर’ ही ‘लालटेन है’. सूत्रों के मुताबिक इन सीटों पर जेडीयू कार्यकर्ता अपने गठबंधन के बजाए आरजेडी के उम्मीदवारों को जिताने के लिए रणनीति बना रहे हैं.
गठबंधन के तहत गोविंदगंज, सिमरी, बख्तियारपुर, दरौली, गरखा, साहेबपुर कमाल, बखरी, परबत्ता, नाथनगर, पालीगंज, ब्रह्मपुर, डेहरी, हलरामपुर, मखदुमपुर, ओबरा, सुगौली, बेलसंड, मढ़ौरा, शेरघाटी, बोधगया, रजौली, गोविंदपुर, बोचहा, फतुहा, बहादुरगंज, महुआ, चेनारी, मनेर, कसबाये ये वो सीटें हैं जो चिराग पासवान के कोटे में गई हैं.
एनडीए के बीच इस घमासान पर कांग्रेस नेता प्रो. रविकांत ने भी चुटकी ली, उनका कहना है कि ‘एनडीए की हालत ये है कि वे आपस में ही सिर-फुटव्वल कर रहे हैं. नीतीश कुमार चिराग पासवान को डुबाने पर लगे हैं और चिराग पासवान को तो यही टास्क ही मिला है नीतीश कुमार को कमजोर करना. नीतीश कुमार पुराने खिलाड़ी हैं उनके सामने चिराग पासवान जैसे नौजवान, नौसिखिए जिनका कोई एजेंडा नहीं है, कोई विचारधारा नहीं है, नहीं टिक सकेंगे.’
सूत्रों की माने तो जेडीयू के साथ जीतन राम मांझी की पार्टी भी चिराग पासवान का खेल बिगाड़ने में शामिल है.
सीएम पद की गुणा गणित!
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस बार लोजपा को नुकसान होता है, तो इसका सीधा फायदा नीतीश कुमार को मिलेगा. वह फिर से एनडीए में अपनी स्थिति मजबूत करेंगे और चिराग पासवान को उसी खेल से मात देंगे, जो 2020 में उनके खिलाफ खेला गया था. दरअसल ये पूरा खेल सीएम पद को लेकर भी है. इस बार बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने नीतीश कुमार को सीएम बनाने की बात नहीं कही है. माना जा रहा है कि इस बार बीजेपी नीतीश कुमार के बजाए अपना सीएम बनाना चाहती है. ऐसे में नीतीश की कोशिश है कि उनके पास ज्यादा से ज्यादा विधायकों की संख्या तो हो ही विपक्ष भी इस स्थिति में रहे कि मौका बने तो महागठबंधन के समर्थन से नीतीश सीएम बन सकें.
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