पटना: पटना के गाँधी मैदान स्थित आलीशान होटल मौर्या में मंच सजा था, कैमरे ऑन थे, और सभी प्रमुख चेहरे मौजूद — मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी… लेकिन सब कुछ चंद सेकंड में ही खत्म हो गया. एनडीए का चुनावी घोषणापत्र ‘संकल्प पत्र’ जारी हुआ, और प्रेस कॉन्फ्रेंस महज 26 सेकंड में खत्म. नीतीश कुमार पूरे कार्यक्रम में मौन बैठे रहे — न एक शब्द बोले, न कोई संदेश दिया. इस “चुप्पी” ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया.
राजनीति के गलियारों में सवाल उठने लगे — क्या नीतीश अब एनडीए में केवल ‘मौन मुख्यमंत्री’ बनकर रह गए हैं? क्या भाजपा ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है? और क्या यह वही नीतीश हैं जो कभी ‘राजनीति के मास्टर स्ट्रोक’ चलकर बिहार की सत्ता का समीकरण बदल दिया करते थे?
मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर फंसा रार!
सूत्रों की माने तो एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार को सीएम फेस घोषित नहीं करने से नीतीश और उनके समर्थक नाराज हैं. शायद यही कारण है कि पीएम मोदी की पिछली दो चुनावी रैलियों में नीतीश उनके साथ मंच पर नहीं थे. सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार ने इसके लिए बीजेपी को डेडलाइन भी दिया था लेकिन बीजेपी की तरफ से किसी बड़े नेता ने कोई घोषणा नहीं की.
विपक्ष का पलटवार — “26 सेकंड की चुप्पी पर सवालों की गूंज”
विपक्ष ने इस मौके को तुरंत भुना लिया. कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, “एनडीए ने नीतीश को बोलने नहीं दिया — यह बिहार और बिहारी अस्मिता का अपमान है.” वहीं तेजस्वी यादव ने इसे “सॉरी पत्र” बताते हुए तंज कसा, “26 सेकंड का यह आयोजन एनडीए की डर और दरार दोनों को उजागर करता है. अब यह गठबंधन केवल जुमलों का पुलिंदा रह गया है.”
राजद का मिशन 143 और एनडीए की बेचैनी?
लेकिन इसी बीच, एनडीए की इस हलचल के समानांतर, विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपनी चुनावी रणनीति स्पष्ट कर दी है. पार्टी इस बार 143 सीटों पर मैदान में उतर रही है. इनमें से 50 सीटों पर सीधा मुकाबला भाजपा से, 20 पर लोजपा (रामविलास) से, 6 पर उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम से और 5 पर जीतन राम मांझी की पार्टी से होगा. यानी बिहार का यह चुनाव चार-तरफा संघर्ष में तब्दील होता दिख रहा है — जहां हर सीट एक अलग कहानी कहेगी.
एनडीए के चुनावी घोषणापत्र जारी होने के कुछ ही घंटों बाद जेडीयू के आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर एक ऐसा पोस्टर सामने आया, जिसने सियासी गलियारों में नई हलचल मचा दी. पार्टी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ एक पोस्टर जारी किया, जिस पर लिखा था — “फिर लौटेगी नीतीश सरकार.”
दिलचस्प बात यह रही कि इस पोस्टर में न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा था, न ही एनडीए के किसी अन्य नेता का. बस नीतीश कुमार अकेले फ्रेम में नजर आए. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस कदम से उन अटकलों को और बल मिला है कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर पाला बदलने या ‘पलटी’ मारने की तैयारी में हो सकते हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए के भीतर बढ़ती बेचैनी और नीतीश की खामोशी भाजपा की रणनीतिक बढ़त को तो दर्शाती है, लेकिन इसका फायदा राजद को मिल सकता है, जो खुद को “विकल्प नहीं, समाधान” बताने में जुटी है.
भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “यह सब प्रोपेगैंडा है. नीतीश जी पूरी तरह गठबंधन के साथ हैं. संकल्प पत्र छोटा इसलिए था ताकि मीडिया सवालों पर समय बर्बाद न करे.”
बीजेपी भले इंकार करे लेकिन कयासों का बाजार गर्म है. सोर्सेज की माने तो दूसरे चरण के मतदान के बाद ही कुछ बड़ा अपडेट आ सकता है. क्योंकि नीतीश कुमार एक ऐसे चेहरे हैं जिन्हे विपक्ष भी सीएम पद के लिए समर्थन दे सकता है. पहले भी नीतीश के साथ आरजेडी सरकार बना चुकी है. हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इस बार बीजेपी कोई चांस लेना नहीं चाहती इसलिए उसका प्लान भी तैयार है. ऐसे में दो अहम सवाल हैं पहला तो ये कि क्या चुनाव बाद एनडीए टूट जाएगा और दूसरा ये कि क्या चुनाव बाद जेडीयू टूटेगी?