Trending News

न्यू स्टार्ट खत्म, ट्रंप की नई परमाणु डील की तैयारी…रूस के साथ चीन को शामिल करने की मांग!

वॉशिंगटन: अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली न्यू स्टार्ट संधि 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई, और इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई और “बेहतर” परमाणु हथियार नियंत्रण संधि की जरूरत पर जोर दिया है। ट्रंप का कहना है कि पुरानी संधि को बढ़ाने के बजाय अब समय आ गया है कि एक आधुनिक, मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली नई डील तैयार की जाए — और इस बार इसमें चीन को भी शामिल किया जाए।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर न्यू स्टार्ट को “खराब तरीके से बातचीत की गई डील” बताते हुए कहा कि अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञों को नई संधि तैयार करने पर काम करना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्तमान वैश्विक स्थिति में परमाणु संतुलन केवल अमेरिका और रूस के बीच नहीं रह गया है, बल्कि चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य ताकत भी इस समीकरण का अहम हिस्सा बन चुकी है।

चीन की भूमिका बनी सबसे बड़ी चुनौती

न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने के साथ ही 21वीं सदी में पहली बार अमेरिका और रूस के परमाणु कार्यक्रमों पर कोई बड़ा औपचारिक प्रतिबंध नहीं बचा है। इस संधि के तहत दोनों देशों को अपने तैनात रणनीतिक परमाणु वारहेड्स की संख्या 1,550 तक सीमित रखनी होती थी और साइट पर निरीक्षण जैसे सख्त सत्यापन उपाय भी लागू थे। अब रूस ने साफ कर दिया है कि वह संधि के दायित्वों से बंधा नहीं है, हालांकि दोनों देशों के बीच किसी अस्थायी समझौते की संभावना पर बातचीत की खबरें भी सामने आ रही हैं।

ट्रंप लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि नई परमाणु संधि में चीन को शामिल करना जरूरी है, लेकिन बीजिंग ने इस प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी है। चीन का कहना है कि उसका परमाणु शस्त्रागार अमेरिका और रूस की तुलना में काफी छोटा है, इसलिए उसे इस तरह की त्रिपक्षीय बातचीत में शामिल करना “न तो निष्पक्ष है और न ही उचित।” दूसरी ओर पेंटागन का अनुमान है कि चीन तेजी से अपना परमाणु भंडार बढ़ा रहा है और 2030 तक उसके पास 1,000 से ज्यादा वारहेड्स हो सकते हैं।

पुतिन मौजूदा संधि को बढ़ाना चाहते थे

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले मौजूदा सीमाओं को एक साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस पर आगे प्रगति नहीं हो सकी। अब संधि के पूरी तरह समाप्त होने के बाद रूस ने इसके खत्म होने पर खेद जताते हुए कहा है कि वह नई बातचीत के लिए तैयार है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इसे “गंभीर क्षण” बताते हुए चेतावनी दी है कि परमाणु हथियार नियंत्रण व्यवस्था कमजोर पड़ना वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि चीन को शामिल करने की कोशिश नई संधि की बातचीत को और जटिल बना सकती है, खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन युद्ध के कारण रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। ट्रंप की यह पहल उनके दूसरे कार्यकाल में वैश्विक परमाणु हथियार नियंत्रण पर नई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, और अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका, रूस और चीन किसी नई प्रभावी परमाणु समझौते पर सहमत हो पाएंगे या नहीं।

news desk

Recent Posts

BRICS Summit 2026: क्या है पुतिन का ‘मास्टरप्लान’? मुंबई से मॉस्को तक बिछेगा सीधा रेलवे नेटवर्क, INSTC प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026)…

26 minutes ago

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बड़ा फेरबदल: 2027 के अंत तक HDFC, SBI और Kotak सहित 6 बड़े बैंकों को मिलेंगे नए CEO

नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अगले 18 महीनों में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन का गवाह…

33 minutes ago

दिल्ली में ‘पावर मीटिंग्स’ का दौर! मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात क्यों खास?

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा शुरू…

38 minutes ago

पंजाब चुनाव 2027: ‘बिना सीएम चेहरे के मैदान में उतरेगी कांग्रेस’, प्रभारी सचिन पायलट का बड़ा ऐलान

जयपुर। पंजाब कांग्रेस के नवनिर्वाचित प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने शुक्रवार…

39 minutes ago

दिल्ली जाने से पहले चेक कर लें ट्रेन नंबर! कैंसिल और डायवर्ट ट्रेनों की पूरी लिस्ट

दिल्ली जाने का प्लान है? तो निकलने से पहले अपनी ट्रेन का नंबर जरूर चेक…

4 hours ago