पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। सूबे की सियासत उस वक्त चरम पर पहुंच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के आवास के बाहर अचानक भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया।
TMC का सीधा आरोप है कि ‘दीदी’ को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए प्रशासन ने उन्हें उनके ही घर में ‘नजरबंद’ करने की साजिश रची है।
‘सुपर इमरजेंसी’ जैसे हालात: TMC ने उठाए गंभीर सवाल
ममता बनर्जी के घर के बाहर सुरक्षा घेरा कड़ा किए जाने पर पार्टी के दिग्गज नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है:
- डोला सेन (TMC सांसद): “बंगाल और कोलकाता में आखिर चल क्या रहा है? बरुईपुर की इतनी भयानक घटना के बाद जन नेता ममता बनर्जी वहां जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें रोकने के लिए पुलिस लगा दी गई। क्या यह सुपर इमरजेंसी है? पुलिस प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह गलत है।”
- मदन मित्रा (TMC नेता): “जनता की आवाज को इस तरह लाठी और पुलिस के दम पर दबाया नहीं जा सकता। जैसे आरजी कर अस्पताल मामले में न्याय की गूंज उठी थी, वैसे ही बारुईपुर की बेटी को भी इंसाफ मिलकर रहेगा।”
बड़ा अपडेट: मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है। TMC सांसद सायानी घोष ने बताया कि निष्पक्ष जांच के लिए उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी इस संबंध में बातचीत की है।
अभिषेक बनर्जी का तीखा वार: “BJP राज में अपराधियों को मिल रहा राजनीतिक संरक्षण”
इस पूरे घटनाक्रम पर TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के दावों को खोखला बताते हुए कहा:
“बीजेपी बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा का वादा करके सत्ता में आई थी, लेकिन आज हर घटना उनके दावों की पोल खोल रही है। सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि जघन्य अपराधों के आरोपियों को अब यह लगने लगा है कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। जहाँ राजनीतिक रसूख कानून से बड़ा हो जाए, वहाँ न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब न्याय और आक्रोश राजनीतिक चश्मे से देखा जाने लगे, तो समाज को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। यह बेहद शर्मनाक स्थिति है।