काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इस बार चुनावी नतीजों ने बड़ा भूचाल ला दिया है। हालिया आम चुनाव में युवा नेतृत्व वाली Rastriya Swatantra Party ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक दलों को पीछे छोड़ दिया है। 5 मार्च को हुए मतदान के नतीजों में पार्टी ने 165 प्रत्यक्ष सीटों में से 125 सीटें जीत ली हैं। वहीं आनुपातिक प्रतिनिधित्व में भी पार्टी को करीब 48 प्रतिशत वोट मिले हैं।
नेपाल की 275 सदस्यीय House of Representatives of Nepal में बहुमत के लिए 138 सीटों की जरूरत होती है, और आरएसपी की इस बड़ी जीत ने बिना किसी गठबंधन के सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह जीत नेपाल में युवाओं और बदलाव की राजनीति का संकेत है।
इस चुनाव में पार्टी के संस्थापक और चर्चित नेता Balen Shah सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं। उन्होंने काठमांडू-1 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को बड़े अंतर से हराकर सभी को चौंका दिया। अपनी जीत के बाद शाह ने इसे “युवाओं की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि यह नतीजा भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से परेशान जनता के गुस्से को दिखाता है और उनकी पार्टी पारदर्शी शासन देने की कोशिश करेगी।
हालांकि मतदान को लेकर भी कुछ सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 1.89 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 5 प्रतिशत वोट ही पड़े, जबकि आधिकारिक तौर पर अधिक मतदान की उम्मीद जताई जा रही थी।
सरकार गठन की तैयारी तेज, बालेन शाह बन सकते हैं प्रधानमंत्री
चुनाव नतीजों के सामने आने के बाद अब सरकार बनाने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। चुनाव आयोग जल्द ही अंतिम परिणाम राष्ट्रपति को सौंपने वाला है। नेपाल के संविधान के मुताबिक इसके बाद बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
चूंकि आरएसपी के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है, इसलिए माना जा रहा है कि बालेन शाह अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार काठमांडू में अगले सप्ताह शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो सकती हैं। बताया जा रहा है कि नई कैबिनेट में युवा नेताओं और स्वतंत्र चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि पारंपरिक दलों ने आरएसपी को “अनुभवहीन” बताते हुए गठबंधन की संभावना पर चर्चा शुरू की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल शाह की पार्टी को किसी सहयोगी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विपक्ष ने हार स्वीकार की, लेकिन दी चेतावनी
चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान पारंपरिक पार्टियों को हुआ है। Nepali Congress को केवल 18 सीटें मिलीं, जबकि Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) को 9 और Communist Party of Nepal (Maoist Centre) को 8 सीटों से संतोष करना पड़ा।
हार के बाद भी विपक्षी नेताओं के बयान सामने आने लगे हैं। केपी शर्मा ओली ने कहा कि यह हार उनके लिए सबक है, इसके पहले ओली ने कहा था कि “RSP सरकार पुराने केस ओपन करके UML लीडर्स को टारगेट कर सकती है, और यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की साजिश है।
वहीं Pushpa Kamal Dahal ने कहा कि सीटें कम होने के बावजूद उनकी पार्टी मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी और सरकार के कामकाज पर नजर रखेगी। दूसरी तरफ Sher Bahadur Deuba ने माना कि यह चुनाव जनता का संदेश है कि नेपाल की पुरानी राजनीति को बदलना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 17 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बदल चुकी हैं, इसलिए नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की होगी। अगर बालेन शाह की सरकार अपने वादों—जैसे भ्रष्टाचार पर लगाम, रोजगार बढ़ाना और संतुलित विदेश नीति—पर काम कर पाती है, तो नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है।